Saturday, April 18, 2026

चिरईगांव ब्लॉक में जलनिकासी कार्य विवाद: बीडीओ ने पत्रकारों को दी चेतावनी मानकों की अनदेखी पर सवाल पूछने पर बीडीओ का विवादित बयान,पत्रकारों के अधिकार पर उठे सवाल

चिरईगांव:विकास खंड चिरईगांव मुख्यालय परिसर में चल रहे जलनिकासी पाइप डालने के काम में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पाइप के नीचे न पीसीसी डाला गया, न गिट्टी डाली गई, और चैम्बर निर्माण में पुरानी ईंटों का उपयोग किया जा रहा है।

जब पत्रकारों ने कार्य में मानकों की अनदेखी पर सवाल किया, तो बीडीओ छोटेलाल तिवारी ने वीडियो में विवादित बयान देते हुए कहा—

“आज के बाद ब्लॉक के परिसर में कहीं भी दिखाई मत दीजिएगा बिना मेरी अनुमति के।”

आप लोगों को बुलाया जायेगा तभी परिसर में आइयेगा। हम आप लोगों को बुलवायेगें।लेकिन मानक के बारे में बताने से इंकार कर दिये। डाली जा रही पाईप के नीचे नहीं बालू और नहीं गिट्टी डाली जा रही है।
उल्लेखनीय है कि जलनिकासी के निर्माण कार्य के लिए निर्धारित मानकों के बारे में अवर अभियंता लघु सिंचाई अशोक यादव का कहना है कि सीमेंट की पाईप डालने से पहले नीचे पीसीसी होता है।लेवल करके ही पाईप डाली जाती है।निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाले पाईप, बालू के लिए भी मानक निर्धारित है।उसके अनुसार ही कार्य कराना होता है।अगर कहीं ऐसा नहीं किया जा रहा है।तो गलत है।जब उनसे ब्लॉक परिसर में हो रहे जलनिकासी कार्य के मानक के बारे में पूछा गया तो बोले कि मानक के अनुसार कार्य हो रहा है। जलनिकासी कार्य हेतु डाली जा रही पाईप के नीचे पीसीसी नहीं किये जाने चैम्बर निर्माण में पुरानी ईटों के प्रयोग किये जाने के बारे में बीडीओ ने कहा कि आप लोग कुछ करते नहीं हैं।केवल कमियां देखते हैं।

कानूनी दृष्टि:

विशेषज्ञों के अनुसार, पत्रकारों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति और सूचना तक पहुँच का अधिकार है। सामान्य सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक निर्माण स्थलों पर पत्रकार रिपोर्टिंग कर सकते हैं। स्थानीय अधिकारी सिर्फ सुरक्षा या संवेदनशीलता के आधार पर रोक लगा सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

पाइप के नीचे पीसीसी अनिवार्य।

चैम्बर निर्माण में नई और पक्की ईंटों का उपयोग जरूरी।

बालू और पाइप की गुणवत्ता के मानक का पालन आवश्यक।

पत्रकारों का अधिकार है सरकारी कार्य का निरीक्षण और रिपोर्टिंग करना।

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