आस्था का केंद्र : प्राचीन काली माता मंदिर लेहरा खास
आस्था का केंद्र : प्राचीन काली माता मंदिर लेहरा खास

शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर जनपद चंदौली का लेहरा खास स्थित प्राचीन काली माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि के दूसरे दिन ही यहाँ भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएँ और पुरुष दूर-दराज़ से आकर माता के दरबार में शीश नवाकर मनोकामना माँग रही हैं।

इस मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यहाँ जो महिलाएँ श्रद्धापूर्वक चावल अर्पित करती हैं, वे कभी पुत्रहीन नहीं रहतीं। साथ ही, उन्हें नैहर से जुड़ी प्रेत-बाधाओं से भी मुक्ति मिल जाती है। यही विश्वास इस मंदिर को अद्भुत आस्था का केंद्र बनाता है। नवरात्रि जैसे पर्व पर यह परंपरा और भी गहराई से जीवंत हो उठती है।

धार्मिक दृष्टि से यह मंदिर न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि इतिहास के पन्नों में भी इसका उल्लेख मिलता है। मन्दिर के पुजारी नन्द बाबा दर्शनिया का कहना है कि यह मंदिर लगभग पाँच हज़ार वर्ष प्राचीन है। इतना ही नहीं, टोडरमल के नक्शे में भी इस मंदिर का जिक्र मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिकता और प्राचीन गौरव को और पुष्ट करता है।

आज के दौर में जब आस्था और भक्ति को कई बार आधुनिकता की दौड़ में भुला दिया जाता है, लेहरा खास का काली माता मंदिर यह संदेश देता है कि विश्वास की डोर ही समाज को जोड़ती है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं करते, बल्कि सामूहिकता, संस्कृति और अध्यात्म की जड़ों से भी जुड़ते हैं।

शारदीय नवरात्रि का यह पर्व काली माता मंदिर की भव्यता और महत्ता को और गहन बना देता है। यह केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि हमारी जीवंत परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
चंदौली से अनिल कुमार उपाध्याय की एक रिपोर्ट