वरिष्ठ पत्रकार एवं जिला अध्यक्ष ( भारतीय पत्रकार संघ ) श्री अनिल द्विवेदी जी ने बताया नवरात्रि के छठे दिन का महत्व

कात्यायनी माता हिन्दू धर्म में नवदुर्गा के छठे रूप के रूप में पूजनीय हैं। नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। वे शक्ति का एक रूप हैं और राक्षसों का नाश करने वाली देवी के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनका नाम ऋषि कात्यायन से जुड़ा हुआ है, जिनके घर में उनका जन्म हुआ था। आइए विस्तार से जानते हैं:
🔱 माता कात्यायनी का परिचय
नाम: कात्यायनी (Katyayani)
स्वरूप: शक्ति की योद्धा रूप
वाहन: सिंह
अस्त्र: त्रिशूल, गदा, कमल, तलवार आदि
हाथों की संख्या: चार
पूजा तिथि: नवरात्रि का छठा दिन (षष्ठी)
🌺 कहानी (पौराणिक कथा)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार महर्षि कात्यायन ने मां दुर्गा को पुत्री रूप में प्राप्त करने की तीव्र तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा।
इन्हें राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए अवतरित हुआ माना जाता है। महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर दिया था और स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया था। तब त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की शक्ति से एक देवी उत्पन्न हुईं, जिन्होंने कात्यायन ऋषि के घर जन्म लिया और आगे चलकर महिषासुर का वध किया। इसलिए इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।
🕉️ माता कात्यायनी की उपासना का महत्व
विवाहित जीवन में सुख के लिए इनकी पूजा की जाती है।
कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति हेतु कात्यायनी माता की आराधना करती हैं।
इनकी कृपा से दुर्गुणों, पापों और दुखों का नाश होता है।
अध्यात्मिक उन्नति और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति में सहायक हैं
🙏 माता कात्यायनी का मंत्र
> ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
या
> चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
🎨 माता का स्वरूप
वे चार भुजाओं वाली हैं।
एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल का फूल। अन्य दो हाथों में अभय और वरमुद्रा। उनका वाहन सिंह है, जो उनके वीरता और शक्ति का प्रतीक है।
जै मां कात्यायनी
चंदौली से ~ अनिल कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट