“काशी में पुलिस की दहाड़ — 200 फोर्स, ड्रोन और RAF के बीच ‘दालमंडी’ में भवन ध्वस्त!”
जनता की आवाज
*वाराणसी* — धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील इलाका दालमंडी (काशी) में आज सुबह ही प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 200 पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ एक मकान ध्वस्त किया। ड्रिल मशीन व हथौड़ों की गड़गड़ाहट के बीच फ्लैग-फोर्स के रूप में Rapid Action Force (RAF) तथा स्थानीय पुलिस गलियों में तैनात थे, जबकि एक ड्रोन ने ऊपर से निगरानी की।
*क्या हुआ?*
प्रशासन ने ‘सड़क चौड़ीकरण एवं विकास’ के नाम पर दालमंडी के संकरे मार्ग तथा भवनों को अधिग्रहित करने का कदम उठाया था।
कार्रवाई के दौरान उक्त मकान पर सुबह-सुबह कार्रवाई शुरू हो गई, जिससे इलाके में जैसे-जैसे फोर्स बढ़ती गई, माहौल दबाव वाला हो गया।
घटनास्थल पर ध्वस्त करने की तैयारी के लिए ड्रिल मशीनें, हथौड़े और भारी फोर्स मौजूद थी।
गलियों में RAF की तैनाती तथा ड्रोन द्वारा ऊपर से मॉनिटरिंग इस बात की पुष्टि करती है कि यह कोई मामूली ऑपरेशन नहीं था बल्कि बड़ी प्लानिंग के साथ संचालन था।
स्थानीय निवासी एवं दुकानदार घटना से काफी चिंतित दिखे; कुछ ने विरोध किया, कुछ ने बचाव-प्रशासन से संवाद की कोशिश की, लेकिन इस अचानक कार्रवाई ने विवाद के स्वर को जन्म दे दिया है।
*प्रशासन की स्थिति*
प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई ‘सार्वजनिक हित’ एवं ‘सड़क चौड़ाई’ की दिशा में की जा रही है – विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम की ओर जाने वाले मार्गों पर बेहतर सुविधा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।
हालाँकि, प्रभावित पक्ष का कहना है कि उन्हें समय नहीं दिया गया, मुआवजे की प्रक्रिया अस्पष्ट है, और अचानक फोर्स के साथ ध्वस्तीकरण किया गया है।
*प्रभाव और माहौल*
दालमंडी बाजार की संकरी गलियों में इस प्रकार की भारी पुलिसकर्मी मौजूदगी ने दैनिक जीवन को अल्प-समय के लिए ठप कर दिया।
सामाजिक व आर्थिक रूप से सक्रिय इलाका होने के कारण इस कार्रवाई का असर स्थानीय व्यापारियों, निवासियों व हिंदू-मुस्लिम संतुलन-भाव पर भी देखा गया।
कोर्ट में पहले ही इस मसले पर याचिका दायर थी जो कहती थी कि बिना उचित प्रक्रिया तथा मुआवजे के ध्वस्तीकरण नहीं होना चाहिए। यह कार्रवाई उसी विवादास्पद मोटिवेशन को पुनर्जीवित करती दिख रही है।
प्रभावित पक्ष प्रशासन से मुआवजा, पुनर्स्थापन और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
यदि संवाद विफल रहा तो कानूनी मोर्चे, प्रदर्शन व विरोध की संभावनाएं खुली हैं।
प्रशासन को अब यह सफ़ाई देनी होगी कि इस तरह की कार्रवाई पूरी प्रक्रिया-पालन के बाद की गई है या नहीं।
यह कार्रवाई काशी जैसे पवित्र, भीड़भाड़ वाले इलाके में बहुस्तरीय विवाद को जन्म दे सकती है — सार्वजनिक विकास व व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।





