
जापान-भारत सहयोग से मुस्तफाबाद में ‘गंगा अनुकूल’ आजीविका परियोजना का शुभारंभ
मुस्तफाबाद (वाराणसी) – ‘वन आधारित गंगा अनुकूल आजीविका परियोजना’ के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की भागीदारी वाली इस

परियोजना के तहत, ग्राम मुस्तफाबाद में बांस का चारकोल बनाने के लिए स्थापित किए गए भट्ठे का विधिवत शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर, ओएस्का (OESCA), जापान और भारत के विशेषज्ञ दल ने विशेष रूप से भाग लिया। ओएस्का, जापान के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमान अकीरा मोरिटा और ओएस्का नॉर्थ इंडिया की डायरेक्टर सुश्री रितु प्रसाद की उपस्थिति ने परियोजना के प्रति अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाया।

जैविक खाद बनेगा गेम चेंजर
परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांस से उच्च गुणवत्ता वाला चारकोल (बायोचार) तैयार करना है, जिसे स्थानीय खेतों में कार्बनिक खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा। जापान से आए बंबू चारकोल एक्सपर्ट श्रीमान आतुशी चिदा और श्रीमान नाकामूरा ने उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी की, जबकि नेचुरल फार्मिंग एक्सपर्ट श्रीमान आकियो चिकुदा और सुश्री यूरी यमआमोतो ने जैविक खाद के अनुप्रयोग पर मार्गदर्शन किया।
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि इस चारकोल-आधारित कार्बनिक खाद के प्रयोग से फसल की उत्पादन क्षमता में 30 से 40% तक की उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जो किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत खोलेगी।
स्थानीय नेतृत्व में शुभारंभ

भट्ठे में पहली आग ग्राम प्रधान पारशनाथ, रणजीत चौहान, और आशीष सिंह जी के हाथों पूजा-अर्चना के बाद प्रज्वलित की गई। यह प्रतीकात्मक शुरुआत भारत और जापान के बीच मजबूत तकनीकी सहयोग और स्थायी ग्रामीण विकास के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह ‘वन आधारित गंगा अनुकूल आजीविका परियोजना’ न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करेगी, बल्कि गंगा के मैदानी इलाकों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा देगी।






