वाराणसी: 10 लाख की मोकलपुर गौशाला दो साल में बंद, बाढ़ क्षेत्र में निर्माण और भ्रष्टाचार के आरोप
अधूरा निर्माण, बर्बाद फंड: अधिकारियों पर घोर लापरवाही का आरोप
वाराणसी (चिरईगांव): चिरईगांव ब्लॉक की ग्राम सभा मोकलपुर में गाँव वालो ने बताया की पंचायती राज फंड से करीब 8 से 10 लाख रुपये की लागत से बनी गौशाला अपने निर्माण के दो साल के भीतर ही बंद हो गई है। वर्ष 2021-22 में बनी यह गौशाला अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग और अधिकारियों की घोर लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में निर्माण:
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गौशाला का निर्माण जानबूझकर ऐसे स्थान पर किया गया, जो हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है। स्थानीय अनुरुद्ध सिंह राजेंद्र यादव भुआल सिंह विजय यादव राजेश लोरीक यादव संजय सिंह निवासियों के अनुसार, यह क्षेत्र अक्सर 2-3 बार जलमग्न हो जाता है, जिसके कारण गौशाला का संचालन मुश्किल हो गया और अंततः इसे बंद करना पड़ा।
अधूरी बाउंड्री और गायब शेड:
गौशाला का निर्माण भी अधूरा है। इसमें चारों तरफ बाउंड्री वॉल नहीं है; केवल एक तरफ से दीवार और गेट लगा है। गौशाला के लिए बनाया गया भूसा घर भी जर्जर हो चुका है। उसकी छत पर लगाई गई टीन की चादरें टूट चुकी हैं और कुछ सामान ग्रामीण उठा ले गए हैं। इसके अलावा, गौशाला तक पहुंचने के लिए रास्ते का निर्माण भी आज तक नहीं हो सका है, जिसका वादा किया गया था।
आश्वासन पर अटकी कार्रवाई:
स्थानीय लोगों ने इस गंभीर विसंगति की जानकारी VDO (ग्राम विकास अधिकारी) चिरईगांव, छोटेलाल तिवारी को दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि VDO ने जांच और कार्रवाई का सिर्फ आश्वासन दिया, जबकि धरातल पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह जनता के पैसे की खुली बर्बादी है और जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन से मांग:
मोकलपुर के निवासियों ने जिलाधिकारी और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, गौशाला निर्माण में हुई धांधली की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जनता के पैसे की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।





