Thursday, February 26, 2026

‘सफेद जहर’ की अगली पीढ़ी पर हमला! डॉक्टर ने खोला बच्चों में साइलेंट किलर हाई बीपी का राज

यथार्थ कॉलेज में गरज उठे डॉ. शुभम सिंह “आपके किचन की ये 3 चीजें 18 साल के नीचे वालों को दे रही हार्ट अटैक का न्योता!”

चंदौली। क्या आप अपने बच्चों को ‘साइलेंट किलर’ का अगला शिकार बना रहे हैं? आजकल 18 साल से कम उम्र के बच्चों में भी हार्ट अटैक और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) के बढ़ते सनसनीखेज मामलों के बीच, यथार्थ नर्सिंग कॉलेज एंड पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट, चंदौली में गुरुवार को आयोजित उच्च रक्तचाप जागरूकता प्रोग्राम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

​ग्लैनमार्क फार्मास्यूटिकल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के केंद्र में रहे मुख्य अतिथि, डॉ. शुभम सिंह (जनरल फिजिशियन, आर.डी. मेमोरियल हॉस्पिटल, चंदौली)

डॉक्टर का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ संबोधन

​अपने तेज़ तर्रार संबोधन में, डॉ. शुभम सिंह ने सीधे-सीधे बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहे खतरे पर वार किया। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली और माता-पिता की कुछ आदतों को हाई बीपी का मुख्य दोषी ठहराया।

डॉ. शुभम सिंह ने चेतावनी दी: “हम बच्चों को बचपन में ही बुढ़ापे की बीमारी दे रहे हैं। वह ज़माना गया जब हाई बीपी 50 साल के बाद होती थी। आज 15 साल के बच्चे भी साइलेंट किलर के शिकार हो रहे हैं। इसका सीधा कनेक्शन आपके किचन और फ्रिज से है! सफेद नमक का अत्यधिक सेवन, शुगर से भरे पैकेज्ड फूड्स और ट्रांस फैट वाले जंक फूड्स—ये वो तीन ‘सफेद जहर’ हैं जो सीधे उनके दिल पर हमला कर रहे हैं।”

​उन्होंने माता-पिता को आगाह किया कि बच्चों की प्लेट से तुरंत ये चीजें हटाएँ और उन्हें खेल के मैदान में भेजें।

मुख्य हाईलाइट्स:

  • 18 साल से कम उम्र में हाई बीपी: डॉ. सिंह ने बताया कि बच्चों में हाई बीपी का मुख्य कारण मोटापा (Childhood Obesity) है, जो निष्क्रिय जीवनशैली (स्क्रीन टाइम) और खराब खान-पान का नतीजा है।
  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा: उन्होंने स्पष्ट किया कि बचपन का अनियंत्रित उच्च रक्तचाप बड़े होने पर उन्हें हृदयघात, किडनी फेलियर और स्ट्रोक की ओर धकेल देता है।

  • समाधान है सख्त: उन्होंने फास्ट फूड के स्थान पर फल, सब्ज़ियां, और कम नमक वाले आहार को अपनाने की सलाह दी।

ग्लैण्डमार्क फार्मा और कॉलेज की पहल

​ग्लैण्डमार्क फार्मास्यूटिकल ने इस गंभीर विषय पर समाज का ध्यान केंद्रित करने के लिए डॉक्टर और कॉलेज की पहल की सराहना की। यथार्थ नर्सिंग कॉलेज ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम स्वास्थ्य सेना तैयार कर रहे उनके छात्रों के लिए एक आवश्यक सबक हैं।

​यह कार्यक्रम एक तीखी घंटी बजाता है—बच्चों के स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करने की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

चंदौली से ~ अभिषेक उपाध्याय के रिपोर्ट

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