🗑️ चिरईगाँव का शर्मनाक सच: तरयां RRc सेंटर बना गांजा-दारू का अड्डा
वाराणसी के चिरईगाँव ब्लॉक में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये की लागत से बना RRc (रिकवरी एंड रीसाइकिलिंग) सेंटर सरकारी धन के दुरुपयोग और अधिकारियों की घोर लापरवाही का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है। ग्राम सभा तरयां में कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित यह केंद्र, आज असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना और खुलेआम गांजा-दारू पीने का अड्डा बन चुका है।
बदहाली और गंदगी का डेरा
गाँव के कूड़े को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से बना यह सेंटर खुद गंदगी का घर बन गया है। इसके चारों ओर और अंदरूनी हिस्सों में भयंकर गंदगी पसरी हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस मूल्यवान सरकारी संपत्ति में ताला तक नहीं लगा है, जिसने इसे असामाजिक तत्वों के लिए 24 घंटे उपलब्ध करा दिया है। \
VDO की लापरवाही पर गंभीर आरोप
इस बदहाली का मुख्य कारण ग्राम विकास अधिकारियों (VDOs) की घोर लापरवाही है। चिरईगाँव ब्लॉक के VDOs पर अक्सर हर कार्य में ‘अपना हिसाब’ (रिश्वत) लेकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप लगता रहा है। तरयां ग्राम सभा के VDO रमाशंकर पर भी यही आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें गाँव के विकास और सरकारी संपत्ति की देखरेख से कोई सरोकार नहीं रहता, जिसके कारण लाखों की यह संपत्ति बर्बाद हो रही है।
निष्प्रभावी समिति और राजनीतिक दुरुपयोग
गाँव में वर्तमान में कार्यरत त्रिस्तरीय समिति भी इस दुरुपयोग को रोकने में निष्प्रभावी साबित हो रही है। ग्रामीणों कमलेश, गुड्डू, सोमारू, रिंकू, बबलू, वीरेंद्र, और मोहन ने आरोप लगाया है कि यह सब पूर्व ग्राम प्रधान संजय जैसवार के इशारों पर हो रहा है, जिससे सरकारी धन का बेखौफ दुरुपयोग जारी है।
प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को तुरंत इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। जिम्मेदार VDO रमाशंकर और अन्य लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी संपत्ति को बर्बाद होने से बचाया जा सके और तरयां गाँव को इस ‘गंदगी के घर’ से मुक्ति मिल सके।






