वाराणसी (आराजी नेवादा): वाराणसी के गौराकलां स्थित हरिवंधु इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और डरावना मामला सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने बिजली विभाग के कड़े नियमों को ताक पर रखते हुए 400 KV (किलोवोल्ट) की हाई-वोल्टेज बिजली लाइन के ठीक नीचे बच्चों के लिए टीनशेड का निर्माण करवा दिया है। यह लापरवाही किसी भी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
नियमों की धज्जियां उड़ा रहा स्कूल प्रबंधन
नियमों के मुताबिक, हाई-वोल्टेज लाइनों के नीचे निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस मामले में जब एसडीओ (SDO) संतमुनि से बात की गई, तो उन्होंने सुरक्षा मानकों की गंभीरता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि:
“400 KV की पारेशन लाइन के मध्य बिंदु से 24 मीटर दाएं और 24 मीटर बाएं तक किसी भी प्रकार का पक्का या अस्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता। यदि कोई ऐसा करता है, तो वह पूरी तरह अवैध है।”
विभाग ने पल्ला झाड़ा, खतरे में बच्चे
हैरानी की बात यह है कि विभाग ने कार्रवाई की बात तो की है, लेकिन जिम्मेदारी से हाथ भी खींच लिए हैं। एसडीओ ने स्पष्ट कहा कि यदि इस अवैध निर्माण के कारण कोई अप्रिय घटना या हादसा होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी, बिजली विभाग की नहीं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग केवल नोटिस जारी करके अपनी औपचारिकता पूरी कर रहा है?
टीनशेड और हाई-वोल्टेज लाइन: मौत का जाल
विशेषज्ञों के अनुसार, लोहे या टीन के शेड के ऊपर से जब इतनी क्षमता की बिजली लाइन गुजरती है, तो ‘इंडक्शन’ के कारण शेड में करंट उतरने की संभावना बनी रहती है। खासकर बारिश और नमी के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी शेड के नीचे मासूम बच्चे खेलते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं।
अभिभावकों की चिंता और अनसुने सवाल
इस खुलासे के बाद अब गेंद अभिभावकों और प्रशासन के पाले में है।
क्या स्कूल प्रबंधन को बच्चों की जान से ज्यादा प्यारे चंद वर्ग फुट के निर्माण हैं?
क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?
नोटिस के बावजूद यदि निर्माण नहीं हटता, तो पुलिस और संबंधित विभाग ठोस कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग: स्थानीय नागरिकों और जागरूक अभिभावकों ने जिलाधिकारी (DM) वाराणसी और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इस अवैध और खतरनाक टीनशेड को हटवाया जाए, ताकि हरिवंधु इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।





