बबुरी में मनरेगा मजदूरी विवाद: 42 महीने काम के बाद मजदूर को मिले सिर्फ 10,500 रुपये
चंदौली बबुरी से बड़ी ख़बर
चंदौली जनपद के बबुरी गांव से गरीब मजदूर गोविन्द केशरी के साथ मनरेगा योजना में मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। गोविन्द केशरी का आरोप है कि ग्राम प्रधान बसन्त गुप्ता ने उन्हें मनरेगा योजना के तहत 42 महीने तक लगातार काम कराया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें केवल 18 महीनों की मजदूरी के रूप में 10,500 रुपये ही दिए गए।
मजदूर का कहना है कि जब उन्होंने अपनी बाकी बकाया मजदूरी मांगी, तो प्रधान द्वारा बार-बार टाल-मटोल किया गया। प्रधान का कहना है कि “तुम्हारा हिसाब हो गया है, अब कोई पैसा नहीं मिलेगा।” मजदूर ने यह भी आरोप लगाया कि पैसा मांगने पर उन्हें मनरेगा के काम से भी हटा दिया गया, जिससे उनके और उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया।
मौके पर प्रधान बसन्त गुप्ता से फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि “1 से 2 दिन में हिसाब करके पैसे दे दूंगा।” वहीं गोविन्द केशरी ने स्पष्ट किया कि अगर तय समय में उन्हें पूरी मजदूरी नहीं मिली, तो वह प्रशासन से गुहार लगाकर न्याय प्राप्त करेंगे।
मनरेगा जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार और समय पर मजदूरी देना है, लेकिन बबुरी गांव का यह मामला योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब यह देखना अहम है कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और गरीब मजदूर गोविन्द केशरी को न्याय और बकाया मजदूरी कब तक मिलती है।
चंदौली बबुरी से ~ शिवम् विश्वकर्मा की रिपोर्ट






