Thursday, February 26, 2026

महानिर्वाण दिवस व अभिषेक दिवस पर अघोरपीठ में लगा भक्तों का तांता

महानिर्वाण दिवस व अभिषेक दिवस पर अघोरपीठ में लगा भक्तों का तांता

वाराणसी। 10 फ़रवरी मंगलवार को रविन्द्रपुरी स्थित विश्वविख्यात अघोर पीठ ‘बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड’ में देश-विदेश के हज़ारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखी । मौक़ा था इस पीठ के दसवें पीठाधीश्वर (ब्रह्मलीन) बाबा राजेश्वर राम (बुढ़ऊ बाबा) जी का ‘महानिर्वाण दिवस’ तथा वर्तमान (11वें) पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का ‘अभिषेक दिवस’ । अघोर श्रद्धालुओं और अघोर साधू-महात्माओं के लिए 10 फ़रवरी का दिन बहुत मायने रखता है, लिहाज़ा 9 फ़रवरी की सुबह से ही साधू-संत, महात्माजन तथा श्रद्धालुओं का आगमन इस अघोरपीठ में शुरू हो गया था । 10 फ़रवरी को सुबह दैनिक साफ़-सफ़ाई, आरती-पूजन के बाद इंतज़ार शुरू हुआ, पूरी दुनिया में अघोर परंपरा के आराध्य व मुखिया तथा इस पीठ के वर्तमान (11वें) पीठाधीश्वर, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी की झलक पाने का । और सुबह साढ़े दस बजे अघोराचार्य जैसे ही अपने कक्ष से बाहर निकले, गगनभेदी, ‘हर हर महादेव’ के उदघोष के साथ पूरा अघोरपीठ परिसर गूँज उठा । कतारबद्ध श्रद्धालुओं के बीच उनकी झलक पाने की होड़ लग गयी । लेकिन श्रद्धा अनुशासित होती है, लिहाज़ा इस बात को चरितार्थ करते हुए हर श्रद्धालु अपनी बारी का इंतज़ार करने लगा। इसके पहले अघोराचार्य ने अपने दादा गुरु, बाबा राजेश्वर राम (बुढ़ऊ बाबा) जी, की समाधि का आरती पूजन कर उनको अपनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके बाद अघोराचार्य ने परिसर में मौज़ूद अघोराचार्य बाबा कीनाराम जी तथा अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा अवधूत भगवान राम जी की मूर्ति व् समाधि को भी, आरती-पूजन के ज़रिये, श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। इसके बाद अघोराचार्य जैसे ही अपने विश्वविख्यात ‘औघड़-तख़्त’ पर आसीन हुए, पूरा परिसर एक बार फ़िर से गगनभेदी, ‘हर हर महादेव’ के उदघोष के साथ गूँज उठा। एक-एक कर सभी श्रद्धालु, महात्मा-साधुजनों ने अपने आराध्य का दर्शन किया और प्रसाद ग्रहण किया । दर्शन-पूजन एवं प्रसाद ग्रहण का ये सिलसिला देर शाम तक चलता रहा । इसके बाद विख्यात सामाजिक संस्था ‘अघोराचार्य बाबा कीनाराम शोध एवं सेवा संस्थान’ दिवस भी मनाया गया। उधर प्रशासन ने भी भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए ट्रैफ़िक और सुरक्षा व्यवस्था का पुख़्ता इंतज़ाम कर रखा था। अघोरपीठ परिसर के बाहर मेले जैसा दृश्य था और दर्शन-पूजन के बाद बड़ी संख्या में लोग ख़रीददारी करते भी दिखे।

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