चकिया का ‘मौत’ सेंटर: बिना डॉक्टर के चल रही हैं पैथोलॉजी, मरीजों की जान दांव पर!
चकिया (चन्दौली): कहने को तो यह ‘केयर’ डायग्नोसिस सेंटर है, लेकिन हकीकत में यहाँ मरीजों की रत्ती भर भी परवाह नहीं है। जननी हॉस्पिटल के ठीक सामने स्थित यह सेंटर आज उन सैकड़ों फर्जी सेंटरों का चेहरा बन गया है जो प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहे हैं।
📍 ग्राउंड रिपोर्ट: रजिस्ट्रेशन का ‘कागज’ और फर्जीवाड़े का ‘खेल’
चकिया सरकारी अस्पताल के इर्द-गिर्द फर्जी पैथोलॉजी का जाल मकड़जाल की तरह फैल चुका है। सूत्रों की मानें तो:
दिखावे का रजिस्ट्रेशन: सेंटर के पास कागजों पर रजिस्ट्रेशन तो है, लेकिन रिपोर्ट पर साइन करने वाला कोई भी रजिस्टर्ड पैथोलॉजिस्ट या डॉक्टर वहां मौजूद नहीं रहता।
फर्जी साइन का धंधा: रिपोर्ट पर अक्सर डिजिटल साइन या फर्जी डॉक्टरों के नाम का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि जांच अनपढ़ या अकुशल लड़कों द्वारा की जा रही है।
मरीजों के साथ ‘जुए’ का खेल: बिना डॉक्टर की देखरेख के दी गई गलत रिपोर्ट किसी भी मरीज के इलाज को जानलेवा बना सकती है।
⚠️ सरकारी अस्पताल के ठीक सामने ‘अंधेरगर्दी’
हैरानी की बात यह है कि ये दुकानें सरकारी अस्पताल और जननी अस्पताल के ठीक सामने डंके की चोट पर चल रही हैं। क्या स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक नहीं है? या फिर ‘कमीशन’ के खेल ने अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बांध दी है?
”गरीब मरीज भरोसे के साथ इन सेंटरों पर जाता है, उसे क्या पता कि जिसे वह अपनी जांच रिपोर्ट समझ रहा है, वह उसके डेथ वारंट का हिस्सा भी हो सकती है।”
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
स्वास्थ्य विभाग मौन क्यों है? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
जांच का मानक क्या है? बिना योग्य डॉक्टर के लैब को लाइसेंस कैसे मिला?
दलालों का सिंडिकेट: सरकारी अस्पताल से मरीजों को इन निजी फर्जी सेंटरों तक भेजने वाले दलालों पर कार्रवाई कब होगी?
✍️ टीम की अपील:
अगर आप या आपका कोई परिचित चकिया के इन इलाकों में जांच कराने जा रहा है, तो पहले डॉक्टर की मौजूदगी सुनिश्चित करें। अपनी जान जोखिम में न डालें।
संवाददाता ~ परीक्षित उपाध्याय





