नयी उम्मीद मत रखना सजन इस बार होली में।
नहीं करना हमारी बात पर इनकार होली में।
सड़क है जाम चलना हो गया दूभर सभी का है,
रंगो सबको करो रंग से सरस सत्कार होली में।
उड़े हैं रंग चेहरे के चढ़ाओ रंग मत नकली,
चढ़ाने आ भी जाए तो करो प्रतिकार होली में।
कपट छल छद्म का बाजार रंगों से भरा लेकिन,
जहाॅं तक हो सके करते रहो उपकार होली में।
करें विश्वास किस पर हम बदलते रंग गिरगिट सा,
सभी नेता इकट्ठे हो गये सरकार होली में।
किसी की जान जाए पर इन्हें चिंता नहीं कुछ भी,
मिलेंगे बाॅंटते नेता कयी उपहार होली में।
गये बन विश्व गुरु फिर जहाॅं के हैं तहाॅं हम सब,
करो बातें नहीं सरकार की अब यार होली में।।
डॉ निकेता सिंह
लखनऊ





