Sunday, April 19, 2026
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नवागत SP के ‘अल्टीमेटम’ के अगले ही दिन साहबगंज SHO ने की अनदेखी, पत्रकार की समस्या सुनने से किया इनकार

यह एक गंभीर विषय है जहाँ एक ओर जिले के आलाधिकारी पत्रकारों और जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस का रवैया इसके विपरीत नजर आ रहा है। आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर न्यूज़ पोर्टल के लिए एक विस्तृत खबर नीचे दी गई है:

चंदौली: नवागत SP के ‘अल्टीमेटम’ के अगले ही दिन साहबगंज SHO की बदसलूकी, पत्रकार की समस्या सुनने से किया इनकार

साहबगंज, चंदौली।
जनपद चंदौली में पुलिसिंग के दावों और हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर उजागर हो गई है। जहाँ एक तरफ नवागत पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने कार्यभार संभालते ही मीडिया और जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का आश्वासन दिया है, वहीं दूसरी तरफ साहबगंज थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, UP 18 News के ब्यूरो चीफ परीक्षित उपाध्याय ने कुछ दिनों पूर्व पुलिस अधीक्षक चंदौली को एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसी संदर्भ में जब पत्रकार परीक्षित उपाध्याय साहबगंज थाने पहुँचे, तो वहाँ मौजूद SHO प्रियंका सिंह का व्यवहार बेहद निराशाजनक रहा।
बताया जा रहा है कि जैसे ही पत्रकार परीक्षित उपाध्याय अपनी बात रखने के लिए SHO के कार्यालय में प्रवेश करने लगे, थानाध्यक्ष प्रियंका सिंह ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें टोकते हुए सीधे बाहर जाने को कह दिया। आरोप है कि SHO ने पत्रकार की समस्या को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और प्रोटोकॉल व शिष्टाचार की मर्यादाओं को दरकिनार कर दिया।
SP के दावों पर फिर रहा पानी
विडंबना देखिए कि अभी कल ही नवागत पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने जिले के मीडियाकर्मियों के साथ बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आश्वासन दिया था कि:
मीडियाकर्मियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।
फरियादियों की सुनवाई में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
लेकिन एसपी साहब के इन आश्वासनों के २४ घंटे भी नहीं बीते थे कि साहबगंज SHO ने एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ ऐसा व्यवहार कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
जनता की फरियादों का क्या होगा?
इस घटना के बाद अब क्षेत्र की जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि “जब जिले के एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के ब्यूरो चीफ के साथ थानाध्यक्ष का ऐसा व्यवहार है, तो आम फरियादियों की समस्याओं को वह किस प्रकार सुनती होंगी?”
बड़ा सवाल: क्या चंदौली पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी अपने कप्तान के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं? क्या साहबगंज पुलिस की यह ‘मनबढ़’ कार्यशैली जिले की छवि धूमिल नहीं कर रही है?
स्थानीय पत्रकारों में इस घटना को लेकर काफी रोष है और उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल इस मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित थानाध्यक्ष के विरुद्ध उचित कार्रवाई करेंगे, ताकि जनता और मीडिया का पुलिस पर विश्वास बना रहे।
✍️ रिपोर्ट: piyush Mishra

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