Friday, August 29, 2025

आपदा से बचाव शिक्षा निकेतन में प्रशिक्षण -मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम

आपदा से बचाव शिक्षा निकेतन में प्रशिक्षण
-मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम
ओबरा (सोनभद्र): अग्नि व आपदा से बचाव का प्रशिक्षण मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज ओबरा सोनभद्र में गुरुवार को किया गया। इस अवसर विद्यार्थियों को गैस सिलेंडर में लगी विविध तरीके की लगी आग को बुझाने के बारे में व्यवहारिक रुप से बताया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में खासतौर से गर्मी के मौसम में अत्यधिक ताप के कारण विभिन्न कारणों से आग लगने की घटनाएं बड़े पैमाने पर होती है। उनसे हर साल घरों, खेत-खलिहानों और जान-माल की अपार हानि होती है। शहरी इलाकों में गैस लीक होने, बिजली के कनेक्शनों पर अत्यधिक लोड के कारण शार्ट सर्किट के साथ ही दीवाली पर आतिशबाजी से आग लगने की वारदातें होती है। स्कूलों में प्रयोगशालाओं में असावधानी और जर्जर तारों एवं बिजली कनेक्शनों में कमी के कारण आग लगने की घटनाएँ होती रहती है।
आग से बचावके लिए बिजली के स्विच ढीले तारों और गैस लीकेज को तुरंत ठीक कराएँ। अत्यधिक ताप, हवा और ज्वलनशील पदार्थ ही आग लगने के कारण होते हैं। इनमें से किसी एक को रोक दें तो आग भड़क ही नहीं पायेंगी। आग से बचने का सबसे आसान तरीका है। फौरन आग के प्रकोप से बचकर उस जगह से निकल जाना। नाक को गीले कपड़े से ढककर फर्श पर रेंगते हुए सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है। आग की स्थिति में आवागमन के लिए सिर्फ सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। स्कूलों में आग से बचाव के लिए आने-जाने के रास्ते को निर्वाध रखना चाहिए। यदि आपके विद्यालय के भीतर रसोई घर बना हुआ है तो उसे बाहर करवा है। नियमानुसार हर स्कूल की प्रत्येक मंजिल पर 10 मीटर दूरी पर एक अग्निशमन यंत्र होना चाहिये।
वस्त्रों में आग लगने पर फौरन जमीन पर लेट कर इस तरह से लोट लगायें कि जलने वाला हिस्सा आपके शरीर के नीचे आ जाए। किसी भी स्थिति में भागिए नहीं भागने से आग तेजी से भड़कती है।
भूकंप के लिए साधारण बोलचाल में पृथ्वी की सतह के हिलने को भूकंप कहते हैं। यह पृथ्वी के स्थलमण्डल (फियर) से बहुत सी ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण उत्पन्न होने वाली भूकम्पीय तरंगों की वजह से होता है। जब पृथ्वी की सतह पर मौजूद दो बड़े हिस्से अचानक एक-दूसरे से अलग हट जाते हैं या टकरा जाते हैं या फिर टूट-फिसल जाते हैं तब भूकंप आता है। जिस जगह यह हिस्से एक-दूसरे से अलग होते हैं उसे फॉल्ट या फॉन्ट प्लेन कहा जाता है। रामबलि यादव, मिथिलेश चौबे,फायर सर्विस चोपन सोनभद्र से फायर मैन शनिराज सरोज, शिवनन्द आदि ने विद्यार्थियों को व्यवहारिक जानकारी दी। प्रधानाचार्य अनिल कुमार तिवारी ने प्रशिक्षण देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

Up18news se chandramohan Shukla ki report

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