Friday, August 29, 2025

सही और गलत मतलबी दुनिया ,काली शंकर उपाध्याय की कलम से छोटा सा लेख है कृपया प्रेम दीजिएगा

आज सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर मैंने एक छोटा सा पोस्ट डाला था जिसमें मैंने लिखा था कि सही और गलत क्या है और इस पर मैं लिख ता हूं सुबह से मेरे दिमाग में यह बात चल रही थी कि  सही और गलत क्या है, पैराग्राफ बदलकर संबंधों की बात करते हैं,

बहुत सारे आपके और मेरे ऐसे भी संबंधी लोग हैं जो लोग सिर्फ अपने कार्यों के लिए आपको और हमको इस्तेमाल करते हैं, और ना होने पर हमको आपको दिमागी तौर पर टेंशन भी देते हैं और परेशान भी करते हैं,ऐसे महानुभाव अपने आपको बहुत ज्यादा बुद्धिजीवी और बहुत ज्यादा बुद्धिजीवी समझते हैं और सामने वाले को मेंटली  तौर  पर  अपनी बातें झूठ मूठ का सिद्ध करना चाहते हैं जबकि आमतौर पर ऐसा होता नहीं है और सामने वाला सब कुछ समझता रहता है लेकिन संबंध निभाने के लिए कुछ बोलता नहीं रहता है, और सब कुछ सोचते हुए मुस्कुरा देता है कि भैया आप जो बोल रहे हैं वह सही है क्योंकि वह संबंध का निर्वाहन करना चाहता है, यह एक पाठ ऐसा है जिसमें मतलब एक फर्स्ट पार्टी सेकंड पार्टी को उत्तेजित कर रही है कि आप यह काम क्यों नहीं किए जबकि उस पार्टी के किसी भी ऐसी उसको वह फर्स्ट पार्टी सुनना नहीं चाहती है, इसका भी एक कारण है क्योंकि जो फर्स्ट पार्टी है वह अपने काम में और अपने खुद के निजी लोभ में इतना ज्यादा व्यथित हो चुकी रहती है कि वह सामने वाले के संबंधों के बारे में और उसके ऊपर घटित किस तरह की की समस्या थी उसके बारे में वह कुछ नहीं सोचता है और अपनी समस्याओं को सेकंड पार्टी  के ऊपर थोपता रहता है, और सेकंड पार्टी वालों के किसी भी विचार को जानना भी नहीं चाहता है, यह जो ऊपर लिखा है बातें हैं ऐसे संबंधों के हैं जो आप के लोग आप से और हम से करते हैं सेकंड पैराग्राफ कुछ अलग है जरा ध्यान दीजिएगा बहुत ही मूल्यवान पैराग्राफ रहेगी,

एक हत्यारा व्यक्ति किसी हत्या करके आता है और उसको कुछ हत्या करने के कारण कुछ पैसा मिलता है जोकि अपने परिवार वालों का पालन पोषण वह करता है, जिस पैसे से उसके परिवार का पालन पोषण होता है उस व्यक्ति के परिवार वाले सोचते हैं कि हमारा परिवार का जो मुखिया है वह किस तरह से घर चला रहा है, यह कितने अच्छे मुखिया हैं लेकिन परिवार वाले यह नहीं सोचते हैं कि यह पैसा कहां से आता है किस तरीके से व्यक्ति अपना घर चला रहा है,

पार्ट 2: जिस परिवार की हत्या पार्ट वन वाले ने किया था उसके परिवार वाले बहुत खुश हैं और अपने मुखिया को बहुत ज्यादा अच्छा समझ रहा है वही पार्ट 2 वाले जिनके परिवार के लोगों की हत्या हुई है उनके घर पर और रोना  पड़ा हुआ है एक तरफ पार्ट वन के परिवार वाले पैसा पाकर बहुत ज्यादा खुशी हैं वहीं दूसरी तरफ part-2 वाले अपने परिवार को खोकर बहुत दुखी हैं ,इसमें सही गलत सिर्फ इतना है कि किसी ने अपना परिवार को खो

 दिया और कोई ऐसा है जो अपना परिवार चलाने के लिए किसी की हत्या कर दी,

पार्ट वन की जो हमने लाइन लिखी है वह सिर्फ इसलिए लिखा है कि आप लाख खुशी हो लेकिन अगर आपकी खुशी का कारण किसी परिवार को दुख पहुंचाना है तो वह खुशी किसी काम की नहीं हो सकती है इसी के साथ मैं अपनी कलम को विराम देता हूं सभी को मेरा सादर प्रणाम,

काली शंकर उपाध्याय पत्रकार

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