27 वर्ष पूर्व हुए दहेज हत्या के मामले में जेठानी की जमानत अर्जी मंजूर
वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) राजेश्वर शुक्ला की अदालत ने 27 वर्ष पूर्व हुए दहेज हत्या के मामले में जेठानी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने श्यामदेई उर्फ धर्मा देवी को 75000 – 75000 हजार रुपये की दो जमानतें एवं व्यक्तिगत बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने पक्ष रखा।
⚡अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी हरिश्चन्द्र ने माह जून 1991 में रमेश पुत्र बैजू से अपनी पुत्री मुन्नी देवी का विवाह कराया था। विवाह के चंद माह बाद से ही उसकी पुत्री को प्रताड़ित किया जाने लगा। 15 जुलाई 1993 को सुबह लगभग 8 बजे एक अज्ञात व्यक्ति ने आकर उसे बताया कि आपकी लड़की के साथ बड़ा हादसा हो गया है। वादी उसकी बात पर विश्वास करके अपनी लड़की के ससुराल ग्राम रामडीह गया जहाँ पर उसको स्थानीय लोगों ने बताया कि उसकी लड़की मुन्नी को समधी बैजू व दामाद रमेश व जेठानी श्यामदेई ने मिलकर बीती रात 15 जुलाई 1993 को जान से मार डाले। हरिश्चंद्र घाट से जानकारी मिली की देहांत के रजिस्टर में क्रमांक नं0 2665 पर रामडीह थाना जंसा से मुन्नी देवी पत्नी रमेश की लाश 7 बजे सुबह 15 जुलाई 1993 को लाकर सुबह 8:25 पर जलायी गयी। जिसके आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 111 सन् 1993 अन्तर्गत धारा 498ए, 304बी, 201 भा0द0 वि0 व 3/4 डी पी एक्ट थाना जंसा में पंजीकृत हुआ।
⚡बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व सहयोगी अधिवक्ता धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने तर्क दिया कि वादी मुकदमा की पुत्री का देहांत पीलिया रोग के कारण हुआ। देहांत रजिस्टर पर भी यही अंकित है। दहेज माँगने व उत्पीड़न की कहानी कपोल कल्पित है। दाह संस्कार के समय वादी मुकदमा भी हरिश्चंद्र घाट पर मौजूद था लेकिन, लेन देन के विवाद को लेकर विधिक सलाह लेकर वादी ने झूठा मुकदमा करा दिया। पोस्टमार्टम नहीं हुआ था।
अभियुक्ता श्यामदेई उर्फ धर्मा देवी न तो अस्पताल गयी थी और न ही हरिश्चंद्र घाट गयी थी। सह अभियुक्तगण रमेश व बैजू की जमानत पूर्व में सत्र न्यायालय द्वारा स्वीकृत हो चुकी है।
⚡क्लाउन टाइम्स “ब्रेकिंग न्यूज़” वाराणसी