संस्थान बरेका द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन सम्पन्न
संस्थान बरेका एवं काशी काव्य संगम ,वाराणसी द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत एक शाम मुहम्मद नाशरुल्ला ‘’नसीर बनारसी ‘’ के नाम कार्यक्रम माँ गंगा के
किनारे मे स्थापितऔधोगिक नगरी बनारस रेल इंजन कारखाना के संस्थान हाल मे आयोजित किया गया |इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुहम्मद नाशरुल्ला ’नसीर बनारसी ‘’ जी रहे |कार्यक्रम की अध्यक्षता कंचन सिंह परिहार वारिष्ट साहित्यकार ने किया |इस अवसर पर सर्वप्रथम सरस्वती माँ के फोटो पर मल्यार्पण व दीप प्रवज्जलन कर कार्यक्रम को शुरू किया गया |तत्पश्चात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया |कविता पाठ के दौरान श्री महेंद्र अलंकार ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया |अखलाक भारतीय ने देश को नमन करते हुये कहा की
‘’न चाहु मान मर्यादा न धन दौलत जुटाना है,
बस अपने मुल्क की सेवा मे ये जीवन बिताना है ।
अगर हो दूसरा मौला जनम तो देना भारत मे,
मुझे इस पावन माटी का बहुत कर्जा चुकाना है ।
आलोक सिंह ‘बेताब’ ने आज के वर्तमान स्थिति पर चोट करते हुए कहा की —
“फैल रही है आग मजहबी चारो ओर,
जल रही जनता इन सब के बीच ,
डाल रहे है और ज्वलनशील पदार्थ कुछ लोग ,
जिससे भड़के लोग फैले चारो और उन्माद “
डॉ नसीमा निशा ने अपनी गज़ल प्रस्तुत करते हुए मनोहरी चित्रण को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया
इस अवसर पर श्रीमती करुणा सिंह , रेशमा खातून,प्रतिभा पाल,शबाना ,सविता सौरभ, झरना मुखर्जी , एकता , अत्री भारद्वाज, महेंद्र अलंकार सिद्धनाथ शर्मा ,अकबर खान , विकास विदिप्त , ओम प्रकाश चंचल , संतोष प्रीत , लियाक़त अली ‘जलज ‘ , सिद्धार्थ,शम्भूनाथ पाण्डेय, इत्यादि कवियों ने अपनी अपनी रचनाओ से ऐसा शमा बांधा की लोग मंत्रमुग्ध हो गए । इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा की आज आप लोगो द्वारा मुझे यह जो सम्मान दिया गया है जिससे मै अभिभूत हूॅ ।मै काशी काव्य संगम के सभी पदाधिकारी को साधुवाद देता हूँ । नसीर बनारसी ने अपनी गज़ल से भी लोगो को रुबरु कराया ।कार्यक्रम का संचालन महेंद्र अलंकार ने किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ मे अतिथियों का स्वागत सचिव डॉ नसीमा निशा ने तथा अन्त मे धन्यवाद ज्ञापन आलोक कुमार सिंह ,सचिव संस्थान ने किया ।