सोनभद्र: गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाव बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए
लेकिन यह दोहा कलयुग में बिल्कुल नहीं सटीक बैठता है क्योंकि सोनभद्र के ही एक निजी स्कूल वाले ने स्कूल में ही पढ़ने वाले छात्रों का न टीसी दिया और ना ही मार्कशीट दिया और परिजन बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों तक के कार्यालय की दफ्तर पर जूता घिसते गए यह मामला अगर आम जनमानस तक होता तो कुछ समझ में भी आता लेकिन स्थानीय पत्रकार आनंद प्रकाश तिवारी के ही उनके की है , पुत्र के साथ ऐसी घटना निजी स्कूल वाले करते रहें और स्थानीय पत्रकार हाथ मलते रह गए क्या शिक्षा विभाग इतना लचर होता जा रहा है या शिक्षा मंत्री से लेकर सभी आला अधिकारी लोग प्राइवेट स्कूलों वाले से एकदम विवश हो गए हैं जो कि इनके ऊपर अंकुश नहीं लगाते हैं आज तक आनंद प्रकाश तिवारी जोकि स्थानीय पत्रकार हैं उनके बच्चों को अभी तक टी सी मार्कशीट नहीं मिल पाई और विभागीय लोगों का ट्रांसफर पोस्टिंग भी हो गया जिले के आला अधिकारी कब इस पर संज्ञान लेंगे अगर संज्ञान नहीं ले पाते हैं तो क्या प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था के आगे जिले की शिक्षा व्यवस्था या शिक्षा मंत्री इस पर जवाब कब देंगे या क्या पूरी शिक्षा व्यवस्था इन प्राइवेट स्कूलों वालों के हाथों बिक चुकी है पीड़ित ने जिला अधिकारी सोनभद्र के यहां भी गुहार लगाई और एक पत्र भी लिखा जो निम्नवत है.
सेवा में
श्रीमान जिलाधिकारी महोदय
सोनभद्र
विषय-1- ओम शिव शिवा इंटर कॉलेज मधुपुर द्वारा प्रार्थी के बच्चों में आलोक तिवारी का वर्ष 2019-20 का मूल अंकपत्र तथा अंश तिवारी व अंजलि तिवारी का वर्ष 2020 – 21 का मूल अंकपत्र व टीसी रोके जाने के संदर्भ में
2- जिला विद्यालय निरीक्षक से की गई शिकायत के बाद प्रधानाचार्य द्वारा विद्यालय के रिकॉर्ड पर प्रार्थी का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर प्रार्थी के पक्ष में टीसी व अंक पत्र निर्गत दिखाकर शासन प्रशासन को फर्जी रिपोर्ट प्रेषित कर बार-बार को गुमराह करने के संदर्भ में,
महोदय
प्रार्थना है कि प्रार्थी आनंद प्रकाश तिवारी ग्राम पोस्ट- मधुपुर, अपने तीन बच्चों को पढ़ाने हेतु संदर्भित विद्यालय में प्रवेश दिलाया था, के संदर्भ में प्रार्थी निम्नलिखित निवेदन करता है।
1- यह कि प्रवेश से पूर्व प्रबंधक ने कहा था 3 बच्चों पर एक बच्चे का पूरा शुल्क तथा 2 बच्चों पर एक बच्चे का आधा शुल्क माफ होगा, विद्यालय प्रवेश के बाद 3 बच्चों पर एक बच्चे का आधा शुल्क माफ किया गया है। जो नियमानुसार गलत है।
2 – यह कि विद्यालय कोरोना काल से पूर्व निर्धारित शुल्क से दूने से भी अधिक शुल्क बढ़ाकर मांग रहा था, बढ़ा हुआ अधिक शुल्क न देने पर विद्यालय आलोक तिवारी का वर्ष 2020 का मूल अंकपत्र तथा अंजली तिवारी व अंश तिवारी का वर्ष 2021 मूल अंकपत्र व टीसी फर्जीवाड़ा के तहत आज तक रोक रखा है।
3 – यह कि जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश के बाद दोनों बच्चों का वर्ष 2021 में नेट से अंकपत्र निकलवा कर श्री चंद्रगुप्त मौर्य इंटर कॉलेज मधुपुर में इंटर में प्रवेश दिलाया था। जहां टीसी के अभाव में अंजली तिवारी का नाम काटा जा चुका है। फिर भी अंजलि तिवारी कक्षा 11 के वार्षिक परीक्षा में बैठ चुकी है। जिसका कक्षा 12 में प्रवेश दिलाया जाना अति आवश्यक है।
4 – यह कि दिनांक 09/11/ 2021 को विद्यालय जाकर हिसाब करने के बाद प्रार्थी ₹5500/ जमा कर टीसी व अंकपत्र मांगा था। तब प्रबंधक ने कहा था। कि प्रधानाचार्य छठ पूजा में गए हुए हैं, आएंगे तब मिलेगा, छठ पूजा बाद प्रधानाचार्य द्वारा कहा गया कि प्रबंधिका पूरा फीस मांग रही हैं। तभी आपको टीसी व मार्कशीट मिलेगा। जिसका वॉइस रिकॉर्ड सुरक्षित है।
5 – यह कि तब प्रार्थी मजबूर होकर दिनांक 15/11/2021 को जिला विद्यालय निरीक्षक के समक्ष शिकायती पत्र देकर टीसी व अंक पत्र की मांग किया था। इस पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा डेढ़ माह बाद 4 जनवरी 2022 को संदर्भित विद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा था। प्रधानाचार्य अपना दोष छुपाने हेतु विद्यालय के मूल रिकॉर्ड पर प्रार्थी का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बच्चों का टीसी व अंक पत्र निर्गत दिखाया गया है। जो सरासर गलत व फर्जी है। प्रार्थी आज तक न कोई टीसी वगैरह नहीं प्राप्त किया है। नहीं विद्यालय के रिकॉर्ड पंजिका पर कोई हस्ताक्षर बनाया है।
6 – यह कि जिला विद्यालय निरीक्षक के कार्यवाही से असंतुष्ट होकर प्रार्थी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत दर्ज कराया था। शासन स्तर से बार-बार जांच आने पर संदर्भित विद्यालय फिर वही फर्जीवाड़ा करते हुए अपने स्पष्टीकरण प्रपत्र में लिखता आ रहा है कि प्रार्थी स्वयं अपने बच्चों का टीसी वगैरह अपने हस्ताक्षर से ले गया है। इस संबंध में संदर्भित विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा फर्जी शपथ पत्र भी दिया जा चुका है। कि प्रार्थी अपना स्वयं हस्ताक्षर बनाकर टी सी व अंक पत्र ले गया है। जो सरासर गलत व फर्जी है। इस तरह बार शासन को फर्जी रिपोर्ट भेजकर शासन व प्रशासन को गुमराह करने का कार्य संदर्भित विद्यालय करता आ रहा है। जिसका जांच कराया जाना अति आवश्यक है।
7- यह कि संदर्भित विद्यालय के रिकॉर्ड पंजिका पर बनाया गया हस्ताक्षर प्रार्थी द्वारा नहीं बनाया गया है। इस पर प्रार्थी का चुनौती है कि प्रार्थी ने अंश तिवारी व अंजलि तिवारी का अंक पत्र व टीसी न कभी प्राप्त किया है। नहीं कभी हस्ताक्षर बनाया है। इसका जांच आप श्रीमान जी के अस्तर से किसी माहिर से कराया जाना अति आवश्यक हो गया है ताकि फीस को लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले संदर्भित विद्यालय को दंडित किया जा सके।
8 – यह कि जब उसे संदर्भित विद्यालय को मान्यता मिला है तब से आज तक एक भी प्रशिक्षित अध्यापक नहीं रखे गए हैं। जिससे पढ़ने वाले हर बच्चों का नींव कमजोर हुआ है। फिर भी विद्यालय शुल्क के नाम पर, 1-प्रवेश शुल्क ₹500/ से ₹3500/व ₹4500/,मासिक शुल्क ₹250/, रजिस्ट्रेशन शुल्क ₹500/, छात्रवृत्ति फार्म फॉरवर्ड करने का ₹200/ प्रति छात्र, हाई स्कूल अंक पत्र देने का ₹300/, टीसी देने का 300/ से ₹500/, प्रोजेक्ट शुल्क ₹350/, से ₹520/, नो ड्यूस फार्म ₹100/ का शुल्क वसूला जाता है। यह शुल्क सरकार व अन्य प्राइवेट विद्यालयों की लिस्ट में नहीं मिलेगा।
9 – यह कि विवाद का सबसे बड़ा कारण यह है कि प्रार्थी का पाल्य आलोक तिवारी का एडमिशन संदर्भित विद्यालय जबरदस्ती कक्षा 11 में कर दिया था, प्रार्थी इनके पठन-पाठन की क्रिया से बिल्कुल असंतुष्ट था। इसलिए प्रार्थी इनके विद्यालय में नहीं पढ़ाया तो ये नाराज होकर फीस का बहाना बनाकर बच्चों का टीसी व अंकपत्र ही रोक दिए।
10 – यह कि बढ़ाया हुआ पूरा शुल्क न देने की स्थिति में इन्होंने नो ड्यूस एक फार्म ही नहीं दिया है। बिना नोड्यूल्स के इन्होंने आज तक किसी भी बच्चे को टीसी वगैरह नहीं दिया है। फिर इन्होंने प्रार्थी को कैसे टीसी व अंक पत्र दे दिया ?
अतः आप श्रीमान जी से सादर आग्रह है कि प्रार्थी द्वारा लगाए गए 10 बिंदु के आरोप का जांच क्रमवार कराकर वैधानिक कार्यवाही करते हुए बच्चों का टीसी व अंकपत्र दिलाने की कृपा करें, जिससे कक्षा 12 में बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित न हो सके।
प्रार्थी
आनंद प्रकाश तिवारी
8546044482
प्रतिलिपि – सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित
1-माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ
2-श्रीमान संयुक्त शिक्षा निदेशक मिर्जापुर मंडल मिर्जापुर
3-श्रीमान माध्यमिक शिक्षा सचिव महोदय, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ