योगीराज में गायब हुए एक ही स्कूल के 208 बच्चे।
भ्रष्टाचार रूपी सुरसा के मुंह में समा गए ।
आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी प्रधानाध्यापिका को जांच अधिकारी ने दिया क्लीनचिट।
सोनभद्र(विनोद मिश्र)
शब्दों के हेरा फेरी में माहिर निकले खंड शिक्षा अधिकारी दुद्धी
जी हां यह मामला सोनभद्र के ब्लॉक म्योरपुर के कम्पोजिट विद्यालय कोटा पुनर्वास का है, जहां कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर राजेंद्र निवासी अनपरा द्वारा शिकायत की गई थी कि प्रधानाध्यापिका द्वारा लगभग 200 बच्चों का फर्जी नामांकन किया गया है ।जिसकी जांच खंड शिक्षा अधिकारी म्योरपुर द्वारा की गई और जांच वाले दिन छात्र उपस्थिति लगभग 25% ही रही। प्रधानाध्यापिका सुशीला देवी को निलंबित करके जांच अधिकारी खंड शिक्षा अधिकारी दुद्धी को नामित किया गया और असली खेल यहां से शुरू हुआ। जिस दिन खंड शिक्षा अधिकारी दुद्धी द्वारा विद्यालय पर जाकर जांच की गई उस दिन भी छात्र उपस्थिति 30% से कम रही। निलंबन करके प्रधानाध्यापिका को कहीं अन्यत्र संबद्ध कर दिया गया था ,उस दौरान इस विद्यालय पर अधिकतम उपस्थिति 30 से 35% के बीच ही रही जबकि जांच के पूर्व प्रधानाध्यापिका सुशीला देवी द्वारा यह उपस्थिति 60% तक भरी जाती रही।
खंड शिक्षा अधिकारी दुद्धी द्वारा प्रेषित आख्या के आधार पर इस शिक्षिका को यह निर्देश देते हुए बहाल किया गया है कि कुल नामांकित 401 बच्चों में से 193 का प्रेरणा पोर्टल पर नामांकन कर दिया गया है शेष 208 बच्चों को प्रेरणा पोर्टल पर भी नामांकित करें और इनका आधार कार्ड बनवाएं।
शिकायतकर्ता राजेंद्र से बात करने पर उन्होंने कहा कि इसमें जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय की मिलीभगत से बड़ा खेल किया गया है और यह 208 बच्चे जो कि वास्तव में है ही नहीं इनके हिस्से का फर्जी हाजिरी लगाकर लगभग 2 से ढाई लाख रुपए सालाना एवं लगभग 35 क्विंटल खाद्यान्न की हेराफेरी की गई है । बच्चों के हक के निवाले पर प्रधानाध्यापिका द्वारा न जाने कितने वर्षों से डाका डाला जा रहा है। प्रधानाध्यापिका के कई काले कारनामे अभी उजागर नहीं हुए हैं अपने विद्यालय में कई शिक्षकों को गलत तरीके से छुट्टी देने की भी शिकायत की गई थी लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
राजेंद्र ने कहा कि इसकी शिकायत जिलाधिकारी को कर दी गई है एवं स्कूल शिक्षा निदेशक को भी की जाएगी।