जय गुरुदेव ने आत्मिक चेतना जगाने का दिया संदेश
घोरावल (सोनभद्र)
घोरावल तहसील क्षेत्र के घुआस कालोनी में शुक्रवार शाम बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी पंकज महाराज 14 मार्च को मथुरा आश्रम से तैंतीस दिवसीय शाकाहार-सदाचार मद्यनिषेध आध्यात्मिक वैचारिक जनजागरण यात्रा लेकर निकले हैं। सोनभ्रद जिले के सभी विकास खण्डों में शाकाहार-सदाचार मद्यनिषेध का सन्देश देंगे। आत्मिक चेतना जगाने, जीते जी प्रभु प्राप्ति की सरल साधना बताने तथा अच्छे समाज के निर्माण की प्रेरणा जगाने का लक्ष्य लेकर यात्रा कर रहे हैं। लोगों ने बैण्ड बाजे के साथ भव्य स्वागत किया। इस जिले में पड़ाव का पहला दिन था जो लगातार 6 अप्रैल तक चलता रहेगा। शनिवार प्रातः 11.30 बजे से सत्संग समारोह का आयोजन हुआ। मंच पर अवधू सिंह यादव जिला अध्यक्ष सोनभद्र, सालिकराम साहू आयोजक एवं ब्लाक अध्यक्ष, राम नरेश, रामलला शुक्ल, राधेश्याम (तेन्दुहार), हीरालाल (परसौना), सहयोगी संगत मीरजापुर के अध्यक्ष घूरन प्रसाद आदि ने पुष्पहार भेंटकर स्वागत किया।
श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुये संस्थाध्यक्ष ने कहा कि जब कई जन्मों के पुण्य उदय होते हैं तब हमको यह मनुष्य शरीर मिलता है। चौरासी लाख योनियों में यह सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि इसी शरीर में प्रभु के पास जाने का एक दरवाजा है। इसीलिये इसको महात्माओं ने हरि मन्दिर कहा है किसी ने नर-नारायणी शरीर कहा । जब कोई भेदी महात्मा मिल जाते हैं और इसका भेद जीवों को बता देते हैं, जब मनुष्य सुरत शब्द योग (नाम-योग) की साधना करके अपने शरीर में विद्यमान ज्ञान चक्षु, शिव नेत्र, तीसरा नेत्र खोल लेता है तब पता चलता है कि आद्या महाशक्ति, ब्रह्मा, विष्णु, महेश किन-किन लोकों मे रहते हैं और उनका क्या काम है? ब्रह्म, पारब्रह्म का देश कहां है? इसके लिये पूरे गुरु की बड़ी जरूरत होती है और कहा भी है कि ‘‘गुरु बिन भवनिधि तरै न कोई’’ तथा ‘‘गुरु करैं जानि कै, पानी पियै छानि कै।’’ हमारे गुरु महाराज बाबा जयगुरुदेव ने देश में करोड़ो लोगों के खान-पान में सुधार कर उनके हाथों में भगवान के भजन की माला पकड़ा दी और जीवन बदल दिया। उन्होंने आगे कहा कि महात्माओं के सत्संग के अभाव में आज लोग संस्कार से दूर हो गये। न बड़ों का सम्मान रह गया और न ही छोटों के लिये प्रेम-प्यार का स्थान रहा। युवा बच्चे अपने माता-पिता का ध्यान ही नहीं रख पाते मजबूरी में उनको वद्धा आश्रम में शेष जिन्दगी बितानी पड़ रही है। इसलिये हमारी प्रार्थना है कि अपने बच्चों को आप सत्संग में लाया करें जिससे उनमें उठने-बैठने, स्वागत, सत्कार करने तथा सदाचारी बनने का संस्कार जागे। उन्होंने लोगों से शाकाहार अपनाने तथा शराब जैसी नशीली वस्तुओं के परित्याग करने की अपील भी किया।
इस अवसर पर काफी श्रद्धालु उपस्थित रहे। पुलिस प्रशासन ने शांति व सुरक्षा व्यवस्था किया।