Friday, August 29, 2025

श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान के जन्म के साथ नंद बाबा ने मनाया जन्मोत्सव

श्रीमद् भागवत कथा चतुर्थ दिवस पर भगवान के जन्म के साथ नंद बाबा ने मनाया जन्मोत्सव

भगवान के जन्म उत्सव पर नंद बाबा ने सोना, चांदी, हाथी, घोड़ा अन्य जेवरात खूब लुटाया

मधुपुर (सोनभद्र) मधुपुर बाजार के रामलीला मैदान में चल रहे पावन श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन वृंदावन मथुरा से पधारे युवा विद्वान ब्रजराज दास द्वारा व्यासपीठ से कथा श्रवण कराते हुए बताया कि राजा परीक्षित को जब पता चला कि अब मुझे केवल 1 सप्ताह ही जीवित रहना है। उसी समय राजा परीक्षित सारा राजपाट छोड़कर गंगा किनारे जाकर पूजन पाठ व भजन कीर्तन में तल्लीन हो गए। उसी समय सुखदेव जी गंगा तट पर आ पहुंचे, सुखदेव जी को देखते ही राजा परिचित ने कहा कि प्रभु हमें बताएं कि जिस व्यक्ति की आयु 7 दिन बच्ची हो उसे क्या करना चाहिए ? इतना ही नहीं राजा परीक्षित में सुखदेव जी के सामने जन कल्याण हेतु प्रश्नों की झड़ी लगा दिया। सुखदेव जी ने कहा कि व्यक्ति को अंतर्मुखी होना चाहिए हर मरने वाले व्यक्ति को भजन, कीर्तन, पूजन पाठ व कथा श्रवण करना चाहिए।

मनुष्य के जीवन में सुख के दिन जैसे बीत जाता है पता नहीं चलता है। वैसे ही दुख के भी दिन बीत जाएगा। इसलिए मनुष्य को समय निकालकर अपने परमार्थ हेतु भगवान का भजन करना चाहिए। भजन के अलावा कोई रास्ता नहीं है। भगवान का उत्सव उस तरीके से मनाना चाहिए जिससे भगवान प्रसन्न हो जाएं, भगवान नाम संकीर्तन, भंडारा, दान पुण्य आदि करना चाहिए। मनुष्य जीवन प्राप्त करने का तभी लाभ है जब मनुष्य भजन कीर्तन कर योनि भ्रमण से मुक्ति पा जाए। मनुष्य जीवन का अंतिम लाभ वही है जब मृत्यु के समय भगवान की स्मृति बनी रहे। किसी व्यक्ति को अपने जीवन का अंतिम दिन पता नहीं होता है । इसलिए प्रत्येक दिन की शुरुआत को ही अंतिम दिन मानकर भगवान का भजन करें। जिससे 84लाख योनियों के भ्रमण करने से जीवन बच जाए। व्यक्ति के मरने के बाद साथ केवल धर्म जाएगा। संसार में सरल बनना बड़ा कठिन है परंतु सरल वही बन पाता है जिसके हृदय में श्यामसुंदर बस जाते हैं। वही सरल है,

आगे व्यास जी ने कहा कि जगत सृष्टि में सबसे पहले ब्रह्मा जी की उत्पत्ति भगवान के नाभि से हुआ था। उत्पत्ति होने के साथ ही ब्रह्मा जी तपस्या करने लगे भगवान प्रकट होकर कहे कि अब तुम सृष्टि की रचना करो। ब्रह्मा जी ने कहा प्रभु सृष्टि की रचना कैसे करूं? भगवान ने सारा रास्ता बताया। नारायण ने ब्रह्मा जी को केवल चार श्लोक दिया उन्हीं चारों श्लोक में सारा भागवत कथा है पहले 18000 श्लोक नहीं था। ब्रह्मा जी की नाक से भगवान वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष को मारकर पृथ्वी की रक्षा की थी। जय विजय बैकुंठ में भगवान के दरबारी बनकर भगवान की सेवा कर रहे थे। बैकुंठ में जाने से पहले व्यक्ति की कुंठा समाप्त होना चाहिए। छल, कपट, चोरी, पाप को भगाने वाला व्यक्ति ही कुंठा से मुक्ति पाता है। सनकादिक ऋषि भगवान के दर्शन हेतु बैकुंठ जा रहे थे तभी जय विजय ने रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर सनकादिक ऋषि ने श्राप दे दिया। कि तुम 3 जन्मों तक राक्षस योनि में जन्म लोगे। काफी प्रार्थना करने के बाद जय विजय के श्राप को ऋषि ने कम कर दिया। इस प्रकार जय विजय  3 जन्मों तक राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा था। रावण भगवान शिव का परम भक्त था, फिर भी तीन जन्मो के बाद ही  राक्षस योनि से मुक्ति मिला था।

हिरण्याक्ष , रावण व शिशुपाल के रूप में जन्म लिया जिससे तीनों जन्मों में जय विजय भगवान के हाथों मारा गया। जिससे जय विजय को श्राप से मुक्ति मिली। बिरह में मिलन की इच्छा होती है। मिलन में बिरह नहीं होता, सच्चा सुख बिरह में है। आगे व्यासपीठ से कथा श्रवण कराते श्री दास ने कहा कंस अपनी बहन को काफी लाड़ प्यार करता था। शादी के बाद सोचा कि मैं क्यों न बहन को ससुराल तक छोड़ आऊं, तभी आकाशवाणी हुआ अरे कंस जिस बहन को तू इतने लाड प्यार के साथ पहुंचाने जा रहा है। तू इसी देवकी के आठवीं संतान के हाथों मारा जाएगा। इससे भ्रमित होकर कंश देवकी और वसुदेव को बंदी गृह में बंद कर दिया। कड़ा पहरा लगा दिया। देवकी के जैसे जैसे बच्चे होते गए कंस वैसे वैसे 6 बच्चों को पत्थर पर पटक- पटक कर मार डालता था। इस प्रकार कंस द्वारा 6 बच्चों को मार कर अपना पाप बहुत अधिक बढ़ा लिया।

अष्टम गर्भ में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ। ब्रह्मा जी जब पता चला कि भगवान गर्भ में आ गए हैं तब ब्रह्मा जी भगवान का स्वागत करने आ गए। भगवान के कारागृह में जन्म लेते ही सारे ताले टूट गए, सभी पहरेदार सो गए, देवकी वसुदेव की हथकड़ी ,बेड़ी खुल गए। वसुदेव जी सूप में लेकर भगवान को नंद बाबा के घर रातों-रात पहुंचा दिया। जिससे नंद बाबा ने बड़े उत्साह के साथ भगवान का जन्म उत्सव मना कर हाथी, घोड़ा, सोना ,चांदी, अशर्फी ,जेवरात लुटा कर उत्सव मनाया । इस दृश्य के बाद भगवान का आरती हुआ तत्पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।

Up 18 news report by Anand Prakash Tiwari ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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