आषाढ़ माह में सावन की तरह बरसात
—— खेती किसानी छिच्छी- बिच्छी ।
—– जगह जगह जल भराव से परेशानी ।
सोनभद्र । आषाढ़ के महीने में ही
सावन की तरह झम झम झम मेघ
बरस रहे हैं । एक तरफ ‘पकड़ि वारि की धार झूलता है , मेरा मन ‘
मन भावन सावन की तरह के वातावरण में सुमित्रा नंदन पंत
की पंक्तियां याद आ रही है और
गर्मी उमस से निजात मिली है तो
वही दूसरी तरफ खेती किसानी
का भूषा छाजन आदि छिच्छी –
बिच्छी सा हो रहा है । कही खलिहान में भूषा पानी पानी
बरबाद हो रहा है तो कही गेहूँ
के बोरे बाहर पड़े पड़े भीग रहे
हैं । लगातार तीन दिन से रुक रुक कर हो रही बारिस से प्रकृति
तो धानी चुनर ओढ़ने की तैयारी
कर रही है । पहाड़ पहाड़ियां नहा
धोकर चटक दार दिख रही है ।
वाराणसी शक्तिनगर मार्ग की काली नागिन की तरह बल खाती
घुमावदार सड़क इको प्वाइंट मारकुंडी पर्वत से अलौकिक
सौंदर्य वती दिखाई दे रही है ।
कई प्रपात जीवंत हो कर जीवन
का राग सुनाते प्रतीत हो रहे है ।
ग्रामीण समेत शहरी क्षेत्रों
में जगह जगह जल भराव से लोगो को मुश्किलों का सामना
करना पड़ रहा है । पानी की निकासी को लेकर कही कही कहासुनी भी हो जा रही है । नगरपालिका क्षेत्र की कई
वीथिकाएँ जल जमाव के कारण
कीचड़ युक्त हो गई है ।
इस बरसात से कही खुशी
कही गम की स्थिति है । धान की
नर्सरी डालने वाले किसानों के लिए यह बरसात बरदान साबित
हो रही है तो जिन किसानों के
घर का अभी छाजन छोपन नही
हुआ है वे लोग बरसात के पानी
से हलकान हो रहे है । किसी के
मकान के छत की ढ लैया बाकी
है तो किसी का अनाज अभी
बेचना बाकी है ।
आषाढ़ की इस बरसात को
लेकर पुरनियां काश्तकार घाघ की
कहावतों को याद कर भविष्य की
बरसात को लेकर चिंतित हैं ।
बभनौली कलां ग्रामपंचायत के
80 वर्षीय लोरिक ने शुक्रवार को
कहा कि , ‘ रोहिणि बरसे मृग तपे , आद्रा कुछ कुछ जाय , घाघ
कहें , घाघीन से स्वान भात न खाय ‘ । अर्थात रोहिणि नक्षत्र में
तपन होनी चाहिए । आद्रा नक्षत्र
में कुछ दिन बरसात नही होनी
चाहिए । ऐसी स्थिति जब बनती है तब धान का उत्पादन इतना
अधिक हो जाता है कि स्वान भी
भात खाते खाते ऊब जाते है ।
दुद्धि क्षेत्र का राष्ट्रीय राज्य मार्ग ल उ आ नदी का पुल टूटने
से बाधित हो गया है । इसी तरह
से कई स्थानों पर सम्पर्क मार्ग
टूट जाने से ग्रामीणों के आवागमन में व्यवधान उतपन्न हो
गया है । नगर पंचायतों और नगर
पालिका परिषद क्षेत्र के कुछ
वार्डो में जल भराव के कारण
समस्या है । पानी की निकासी
को लेकर तू तू मैं मैं की स्थिति
भी कई जगह देखने को मिली ।
कुछ लोग इसे आफत की बरसात
मान रहे है तो कुछ लोग सही
वक्त पर हुई बरसात कह रहे है ।
स्थानीय निकायों की ओर से जल
निकासी की व्यवस्था की इस बरसात ने कलई खोलकर रख दी
है । अभी भी आसमान में उमड़ घुमड़ कर काले कजरारे बादल
छाए हुए है ।