Saturday, October 17, 2026

अनूठा इश्क़

अनूठा इश्क़

 

जानती हूँ कि वो

प्यार करता नही,

फिर भी उसकी

रज़ा में है मेरी रज़ा।

उलझने तो बहुत है

इधर भी उधर भी,

ख़ता उस किन्ही,

एहसान मेर भी नहीं।

चलो दोनो मिल कर

एक कहानी लिखे,

एक नई इबादत की

निशानी लिखे।

मौन वो भी है ,

तो तन्हा मैं भी हूँ,

क्यों ना खुद का ‘स्व’

और ‘मैं’ भूल कर।

एक विरले और

अनूठे इश्क़ की,

ख़ुद को घायल कर

उसके पीर आत्मसात की,

मीरा और राधा के

अविरल प्रेम सी,

कहानी लिखें।

पारुल राज

दिल्ली

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