चिरईगांव/वाराणसी: स्थानीय विकास खंड की ग्राम पंचायतों में विगत पांच महीनों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत मजदूरों और सामग्रियों का भुगतान न होने से ग्रामीणों और पंचायत अधिकारियों दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मजदूरों को जहां आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, वहीं ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों को भी मजदूरों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण गांव के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों की मजदूरी और सामग्रियों का भुगतान बीते नवम्बर माह से नहीं किया गया है। इससे गांवों में चल रहे विकास कार्यों की गति भी धीमी पड़ गई है।
बुधवार को ग्राम प्रधानों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष लालबहादुर पटेल के नेतृत्व में विकास अधिकारी (बीडीओ) से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रमुख रूप से ऊदल पटेल, राजेश राम. पारस, राजेश उपाध्याय,शत्रुघन सिंह. विशाल चौहान, घनश्याम यादव, ओमप्रकाश आदि ग्राम प्रधान उपस्थित थे।
ग्राम प्रधानों ने बीडीओ से शीघ्र ही भुगतान प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने की मांग की है ताकि गांवों के विकास कार्यों को फिर से गति मिल सके और मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित भुगतान मिल सके।
यह समस्या ग्रामीणों और पंचायतों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, और अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्यवाही करता है।