Saturday, August 30, 2025

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026: 500 नई ग्राम पंचायतें और 75 नए ब्लॉक, चुनावी तैयारियां तेज़

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026: 500 नई ग्राम पंचायतें और 75 नए ब्लॉक, चुनावी तैयारियां तेज़

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। पंचायतीराज और ग्राम विकास विभाग ने पंचायतों और ब्लॉकों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार राज्य में 500 नई ग्राम पंचायतों और 75 नए ब्लॉकों का गठन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक सुधार के साथ-साथ विकास कार्यों में गति लाना है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

📌 ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन शुरू

राज्य के पंचायतीराज विभाग ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों की आबादी अधिक है, उन्हें विभाजित कर नई पंचायतों का गठन किया जाएगा। इसके लिए हर जिले के जिलाधिकारी और जिला पंचायतीराज अधिकारियों से 5 जून तक रिपोर्ट मांगी गई है। नए मानकों के अनुसार, एक ग्राम पंचायत में कम से कम 1000 की जनसंख्या होनी चाहिए।

2021 में पंचायत चुनाव के समय राज्य में कुल 58,189 ग्राम पंचायतें थीं। लेकिन शहरी निकाय विस्तार के चलते 494 ग्राम पंचायतों को नगर पंचायतों में शामिल कर लिया गया, जिससे वर्तमान में ग्राम पंचायतों की संख्या घटकर 57,695 रह गई है।

🏢 75 नए विकासखंड (ब्लॉक) होंगे शामिल

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने 2022 में 75 नए ब्लॉकों की घोषणा की थी। उनका कहना था कि कई ब्लॉक इतने बड़े हो गए हैं कि वहां विकास कार्यों में कठिनाई होती है। अब बड़े ब्लॉकों को विभाजित कर छोटे ब्लॉक बनाए जाएंगे, जिससे राज्य में ब्लॉकों की कुल संख्या 826 से बढ़कर 901 हो जाएगी।

⚖️ राजनीतिक रणनीति भी शामिल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायतों और ब्लॉकों का पुनर्गठन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक कारणों से भी प्रेरित है। उनका कहना है कि यह पंचायत चुनाव असल में 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल बनकर उभर सकता है। यही वजह है कि सरकार पुनर्गठन की प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दे रही है कि सत्तारूढ़ दल को इसका चुनावी लाभ मिल सके।

राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व आयुक्त एस.के. अग्रवाल ने भी माना कि पंचायत पुनर्गठन में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही कारण होते हैं।

🤝 भाजपा की सहयोगी पार्टियां मैदान में अकेली

इस बार भाजपा की सहयोगी पार्टियां — अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुभासपा — ने अपने दम पर पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसके पीछे क्या वजहें हैं, इस पर चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि यह बदलाव एनडीए की आंतरिक राजनीति और 2027 की तैयारी को दर्शाता है।

🗳️ विपक्ष की भूमिका भी अहम

पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया में विपक्षी दलों — सपा, कांग्रेस, रालोद, निषाद पार्टी, सुभासपा और अपना दल — के विधायक भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार का प्रयास है कि विपक्ष के पारंपरिक वोट बैंक को एक जगह सशक्त न होने दिया जाए।

🔍 नज़र 2027 के विधानसभा चुनाव पर

जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि इन चुनावों के नतीजे 2027 के विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकते हैं।

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