Sunday, April 19, 2026

ऋषि-मुनियों की रक्षा को श्रीराम ने किया ताड़का का वध

चिरईगांव/वाराणसी। हजारों श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बना रामबाग गोकुलपुर की श्रीरामलीला में मंगलवार को विश्वमित्र यज्ञ, ताड़का वध और मारीच, सुबाहु वध का मंचन किया गया। माता सीता ने मिथिला में दोबारा जन्म लिया। राजा जनक के घर सीता के जन्म से जनकपुरी वासी झूम उठे।

 

वन में सुबाहु व मारीच का राज होता है और वे राहगीरों को लूटने के साथ ही मारकाट भी करते रहते हैं। अपनी ताकत के मद में चूर होकर वे विश्वामित्र के यज्ञ को विध्वंस कर देते हैं। राघव को मैं न दूंगा मुनिनाथ मरते मरते, …. विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में

 

पहुंचकर राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को उनके साथ भेजने को कहते हैं।

 

राजा दशरथ के मन में संशय होता है और वे राम-लक्ष्मण को देने से स्पष्ट मना कर देते हैं, लेकिन गुरु वशिष्ठ द्वारा उनके मन के संशय को दूर कर दिया जाता है। राम-लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ वन में जाते हैं, जहां ताड़का के साथ उनका भीषण युद्ध होता है। अंततः ताड़का मारी जाती है। इसके बाद सुबाहु मारीच के साथ हुए युद्ध में सुबाहु मारा जाता है, मारीच भाग कर अपनी जान बचाता है। यहीं पर आरती के साथ श्रीरामलीला

विश्राम लेती है।

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