
चिरईगांव ब्लॉक का बभनपुरा गाँव सरकारी व्यवस्था और दबंगई के बीच फँसे एक गरीब नागरिक की कहानी बयाँ कर रहा है। यह मामला सिर्फ एक सरकारी नाली या सड़क तोड़ने का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि एक पिछड़े क्षेत्र में दबंगों का दुस्साहस इतना बढ़ चुका है कि वे खुलेआम सरकारी संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं।
बभनपुरा निवासी आदिनाथ तिवारी, एक गरीब ब्राह्मण, वर्षों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। दबंगों ने न केवल सरकारी सड़क को नष्ट किया बल्कि सार्वजनिक नाली को भी तोड़ दिया, जिससे जल-निकासी की समस्या गंभीर हो गई है। आदिनाथ तिवारी ने कई बार सीडीओ और बीडीओ सहित उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा। शुरू में, अधिकारियों के आदेश पर काम शुरू हुआ भी, लेकिन दबंगों के दबाव के कारण उसे तुरंत बंद करा दिया गया।
यह घटना व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब एक गरीब नागरिक न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटाता है और उसे केवल ‘झूठा आश्वासन’ मिलता है, तो यह दर्शाता है कि दबंगों और कुछ अधिकारियों के बीच सांठगांठ कितनी गहरी हो चुकी है।
आदिनाथ तिवारी का दर्द समझना आसान है—उन्हें लगता है कि गरीब होने के कारण संसार में उनका कोई नहीं। उनका यह भाव बताता है कि न्यायिक प्रक्रिया में उनका विश्वास डगमगा रहा है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना एक गंभीर अपराध है, लेकिन जब दबंग खुलेआम ऐसा करते हैं और उन्हें राजनीतिक संरक्षण या अधिकारियों का मौन समर्थन मिलता है, तो कानून का डर खत्म हो जाता है।
यह ज़रूरी है कि शासन-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले, तुरंत सरकारी संपत्ति की क्षतिपूर्ति करवाए, और आदिनाथ तिवारी को न्याय दिलाए। अन्यथा, यह घटना एक उदाहरण बन जाएगी कि सरकारी व्यवस्था गरीबों की सुध लेने में विफल है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया से जनता का विश्वास उठना स्वाभाविक है।





