छीतोना ग्राम सभा में सीवर जाम, ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर JCB से कराया समाधान

वाराणसी जिले के चिरईगांव ब्लॉक की ग्राम सभा छितौना ने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया है, जो एक ओर जनभागीदारी की अद्भुत मिसाल पेश करता है, तो दूसरी ओर स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की गहरी विफलता को उजागर करता है। ग्राम सभा छितौना में जब आवश्यक सेवा, यानी सीवर की सफाई का कार्य, लंबे समय तक प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा, तो ग्रामीणों ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए चंदा इकट्ठा किया और इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा किया। यह घटना दर्शाती है कि जब सरकारी तंत्र अपने कर्तव्य से विमुख हो जाता है, तब जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद खड़ी हो सकती है।
प्रशासनिक उदासीनता का बोझ
स्थानीय निवासियों द्वारा किया गया यह कार्य सराहनीय है, लेकिन यह चिरईगांव ब्लॉक के निष्क्रिय प्रशासनिक ढांचे पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि चिरईगांव ब्लॉक के समस्त अधिकारी पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए हैं। ग्राम प्रधान से लेकर ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और खंड विकास अधिकारी (BDO) तक, सबकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह स्थिति बताती है कि प्रशासन की प्राथमिकताओं में जनहित के कार्य निचले पायदान पर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारी केवल ‘घूस’ और ‘पैसा’ कमाने की चिंता में रहते हैं, जिससे ब्लॉक का विकास रुका हुआ है और चिरईगांव ब्लॉक एक ‘पिछड़ा ब्लॉक’ की श्रेणी में आ गया है। इस तरह की कार्यप्रणाली न केवल विकास को बाधित करती है, बल्कि सरकारी सेवाओं पर से जनता का विश्वास भी खत्म करती है। सरकारी खजाने से वेतन लेने के बावजूद, यदि जनता को अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए खुद चंदा करना पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
🌟 जननायक और सामुदायिक सहयोग की जीत
प्रशासनिक विफलता के इस दौर में, छितौना ग्राम सभा के नायक जय गोविंद का कार्य विशेष रूप से प्रशंसनीय है। उनके नेतृत्व और पहल ने ग्रामीणों को एकजुट करने का काम किया। सीवर सफाई के इस जन-अभियान को सफल बनाने में बब्लू, वीरेंद्र, मोहन, गुड्डु, सुरेश, और नीरज जैसे अन्य ग्रामीणों का योगदान भी अतुलनीय है। इन सभी ने यह साबित किया कि सामुदायिक सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
यह घटना यह संदेश देती है कि चिरईगांव ब्लॉक को बदलने की कुंजी जन-जागरूकता और अधिकारियों की जवाबदेही में निहित है।
✅ आगे की राह: क्या करने की आवश्यकता है?
इस घटना को एक सबक के रूप में लेते हुए, चिरईगांव ब्लॉक के प्रशासन को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो:
* जवाबदेही तय करना: जिला प्रशासन को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जिनकी निष्क्रियता के कारण ग्रामीणों को यह कार्य स्वयं करना पड़ा।
* पारदर्शिता लाना: सभी विकास कार्यों की निगरानी में पारदर्शिता लानी चाहिए और खर्च का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिए।
* भ्रष्टाचार पर लगाम: ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी जैसे पदों पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कठोर नियम लागू किए जाने चाहिए और नियमित औचक निरीक्षण होने चाहिए।
* जन-सहभागिता को प्रोत्साहन: अधिकारियों को ग्राम सभा के साथ नियमित बैठकें कर उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और जन-प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करना चाहिए।
* ब्लॉक का कायाकल्प: एक समयबद्ध विकास योजना बनाकर चिरईगांव ब्लॉक को पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए एक विशेष अभियान चलाना चाहिए, जिसमें मूलभूत सुविधाओं की बहाली सर्वोपरि हो।
छितौना के ग्रामीणों ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाकर प्रशासन को एक आईना दिखाया है। अब यह अधिकारियों पर निर्भर करता है कि वे इस आईने में अपना अक्स देखकर सुधार की दिशा में कदम उठाते हैं, या फिर अपनी निष्क्रियता जारी रखते हैं। इस घटना को जनता की जीत और प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि चिरईगांव ब्लॉक में सब कुछ ‘ठीक हो सके’ और जनता को उनका हक मिल सके।