Sunday, April 19, 2026

श्रीमान सम्पादक/प्रबंधक महोदय दैनिक समाचार पत्र/इलेक्ट्रॉनिक चैनल, वाराणसी

सेवा में,

 

श्रीमान सम्पादक/प्रबंधक महोदय दैनिक समाचार पत्र/इलेक्ट्रॉनिक चैनल, वाराणसी ।

 

विषय : दिनांक 27 फरवरी, 2028 दिन शुक्रवार को रंगभरी एकादशी महोत्सव के पर्व के विषयक।

 

महोदय,

 

मैं लोक पति तिवारी पूर्व महंत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर आपको सादर अवगत करना चाहता हूं कि इस वर्ष भी रंगभरी एकादशी महोत्सव का आयोजन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन द्वारा तय कर दिया गया है जिसमें इस वर्ष भी यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि बाबा विश्वनाथ की प्राचीन रजत चल प्रतिमा को पूजन हेतु मंदिर प्रांगण में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इस प्राचीन परम्परा के दिन जो तथाकथित रूप से बाबा की नई प्रतिमा टेढ़ीनीम पर बनाई गई है उसी से पालकी यात्रा निकाल कर उसका पूजन मंदिर गर्भगृह में किया जाएगा, मैंने दिनांक 17 फरवरी को पत्रकार वार्ता के पश्चात जिले के सारे अधिकारियों से इस गंभीर प्रकरण को लेकर वार्ता की परन्तु सभी ने यह स्पष्ट कर दिया कि हमारे ऊपर शासन सत्ता का बड़ा दबाव है, जिसकी वजह से हम सभी तथाकथित रुप से बनाई गई बाबा विश्वनाथ की नई प्रतिमा जो कि जर्मन सिल्वर की बनाई गई है उसी से परम्परा का निर्वहन करवाने को मजबूर हैं और हम बाबा की प्राचीन रजत चल प्रतिमा को मंदिर में मंगवा कर पूजन करवाने में असमर्थ है।

 

मैं उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी से यह विनम्र निवेदन करना चाहता हूं कि काशी जैसी पौराणिक सांस्कृतिक धार्मिक नगरी में इस तरह के भ्रष्ट अधिकारियों को रहने का कोई भी अधिकार नहीं है जो अपनेकर्तव्य और दायित्वों के विपरीत काशी में होने वाली सारी लोक परंपराओं को संचालित करवा रहा है।

 

मैं पूर्व महंत, मंडलायुक्त, मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं मंदिर के डिप्टी कलेक्टर से यह जवाब चाहता हूं कि अगर मंदिर में होने वाली परंपरा प्राचीन है तो उस परंपरा में शामिल होने वाली बाबा की प्राचीन मूल प्रतिमा कहां पर विराजित है और उसे मंदिर प्रांगण में बाबा के गर्भगृह में लाने से वंचित क्यों किया गया है और जब अधिकारियों का यह कहना है कि दोनों परिवार में विवाद है मामला न्यायालय में है तो मंदिर प्रशासन यह कैसे तय कर सकता है की जिस तथाकथित प्रतिमा को लेकर इतना विवाद आगे बढ़ रहा है उसी प्रतिमा को टेढ़ीनीम से मंगवा कर परंपराओं का निर्वहन कर रहा है।

 

जिस तरह विश्वनाथ धाम में प्रत्येक दिवस मंदिर में आने वाले देश-विदेश से पर्यटकों के साथ अवैध वसूली मंदिर प्रशासन अपने कर्मचारियों से करवाता है मुझे लगता है की इसी प्रकार इस परंपरा को लेकर मंदिर प्रशासन को कोई विशेष लाभ का प्रस्ताव मिला होगा जिससे प्रशासन मजबूर होकर प्राचीन परंपरा में बाबा की प्राचीन प्रतिमा को मंदिर में प्रवेश हेतु रोक लगाकर बैठा है।

 

इस गंभीर प्रकरण में काशी की जनता ने जनहित याचिका माननीय उच्च न्यायालय में मुकदमा भी दर्ज किया है, जिसमें यह कहा गया है कि परंपराओं का निर्वहन चाहे टेढ़ीनीम से हो या बड़ा देव स्थित पंडित लोकपति तिवारी के आवास से हो, मंदिर प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह परंपराओं का निर्वहन बाबा की प्राचीन रजत प्रतिमा से संपन्न करवाये, जिससे हम सभी काशी वासियों की आस्था जुड़ी है ।

 

भवदीय

 

sinua

 

(पं० लोक पति तिवारी) पूर्व महंत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी।

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