Friday, August 29, 2025

अघोरी परंपरा के वर्तमान स्वरुप के अधिष्ठाता ईष्ट प्रणेता, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम

हर्षोल्लास के साथ शुरु हुआ ‘बाबा कीनाराम जन्मोत्सव समारोह-2022 ‘औघड़/अघोरी परंपरा के वर्तमान स्वरुप के अधिष्ठाता/ईष्ट/प्रणेता, अघोराचार्य महाराजश्री *बाबा कीनाराम जी, का ‘जन्मोत्सव समारोह’ बाबा कीनाराम जी की के जन्मस्थान, रामगढ़-चंदौली में हर साल श्रद्धा-भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है । हर वर्ष की भांति, इस साल भी, बाबा कीनाराम जी का 423 वां ‘तीन दिवसीय जन्मोत्सव समारोह’ दिनांक 25 अगस्त 2022 से शुरु हुआ , जिसका समापन 27 अगस्त 2022 को यहाँ के पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के आशीर्वचन के साथ होगा । पहले दिन लाखो भक्तों, श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सुबह 4 बजे से ही धार्मिक कार्यक्रम की शुरुवात हो गयी थी । साफ़-सफाई के बाद बाबा कीनाराम जी की प्रतिमा सहित यहाँ परिसर में मौजूद सभी समाधियों का आरती-पूजन किया गया। और फ़िर मानस पाठ और सुन्दर कांड का पाठ हुआ और तदुपरांत हवन का कार्यक्रम चला । बाद में प्रसाद वितरण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। धार्मिक क्रियाकलापों के बाद स्थानीय लोगों द्वारा भजन-कीर्तन और बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया । वैचारिक आदान-प्रदान के तहत शाम 3 से 6 बजे तक ‘विचार-गोष्ठी’ का आयोजन हुआ जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने ‘समाज-राष्ट्र के विकास और अध्यात्मिक चेतना’ पर अपने-अपने विचार व्यक्त किये । शाम को 7 बजे एक बार फिर से आरती-पूजन व् अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ । आख़िर में देश के नामचीन कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया । ग़ौरतलब है कि उत्तर-प्रदेश के चंदौली जिले के रामगढ़ नामक स्थान पर 3 दिवसीय बाबा कीनाराम जी का ‘जन्मोत्सव समारोह’, अध्यात्मिक जगत का, एक अनूठा आयोजन होता है । देश-विदेश में चर्चित इस आध्यात्मिक समारोह में आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ अध्यात्मिक जगत, ख़ासकर अघोर-परम्परा, से जुड़े लोगों का ख़ासा जमावड़ा होता है । लाखों लोग इस समारोह में शिरक़त करते हैं । इतनी भारी-भरक़म भीड़ को नियंत्रित करने और आयोजन को सफ़लतापूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी हफ़्तों पहले से मुस्तैद होते हैं। हमेशा की तरह इस बार भी प्रशासन से जुड़े आला अधिकारियों ने कमान ख़ुद अपने हाथों में ले रखा था, लिहाज़ा हर तरफ़ सुरक्षा-व्यवस्था चाक-चौबंद थी । आयोजन-परिसर के बाहर का माहौल विशाल मेले जैसे रहा, जहाँ हज़ारों दुकानदार इस मौक़े को एक बेहतरीन अवसर के तौर पर देख रहे थे ।

 

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