Sunday, April 19, 2026
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जाती पाती के के नाम पर बहकाकर कर मजा लेते नेता : काली शंकर उपाध्याय की कलम से

जात-पात को लेकर राजनीति करने वालों को आप कैसे देखते हैं?
हम बताते है अपनी राय?
स्वार्थ की राजनीति
जात-पात को लेकर राजनीति करने वालों को अच्छे लोगों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। वे अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति का अनुसरण करते हैं। ऐसे लोग समाज में शांति और सौहार्द बिगाड़ने के लिए जातीय भावनाओं का उपयोग करते हैं। मेरी नज़र में ऐसे लोग दोयम दर्जे के ही माने जाएंगे।
आइए बताते है जाती राजनीति की वजह.

जाति आधारित राजनीति की वजह
अगर कोई नेता जाति या धर्म के नाम पर राजनीति करता है, तो इसका मतलब है कि उसने अपने क्षेत्र में ऐसा कोई जनकल्याणकारी कार्य नहीं किया, जिस पर जनता दोबारा विश्वास कर सके। ऐसे नेता भावनात्मक मुद्दों को हथियार बनाकर वोट मांगते हैं। अगर जनता जात-पात की राजनीति को नकार दे और ईमानदार नेताओं को चुने, तो यह प्रवृत्ति समाप्त हो सकती है।
नेता ही जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा देते
हमारे देश के नेता ही जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा देते हैं। चुनाव में उम्मीदवारों की टिकट जातीय जनसंख्या के आधार पर तय होती है। हालांकि जनता धीरे-धीरे इस मानसिकता से बाहर आ रही है, लेकिन राजनीतिक दलों को भी इस सोच से उबरने की जरूरत है।

शिक्षा और जागरूकता जरूरी है
जातिवादी राजनीति को रोकने के लिए शिक्षा और जागरूकता का प्रसार आवश्यक है। विकास-आधारित राजनीति को प्रोत्साहित करना, सख्त कानून बनाना, और मीडिया व सामाजिक संगठनों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना चाहिए। इन प्रयासों से समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

जाति पाती का सहारा लेकर बहुत सारे नेता इसका फायदा उठा चुके है लेकिन आप जो कार्य करते हैं आप वही कार्य करेंगे यह जात पात की राजनीति  करने करने वाले कभी आपकी भलाई नहीं कर सकते आप उन्हें चुने जो सुयोग्य हो और समाज का विकाश करे जाती पाती शादी के लिए होता है दामाद चुनने के लिए . वोट के लिए नहीं सतर्क रहे सावधान रहे.

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