“पापा, मेरी जान बचा लीजिए” — सब इंस्पेक्टर संजीत सिंह की सतर्कता से युवक की बची जान*
चंदौली। जिले के बबुरी थाना क्षेत्र से एक प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जिसने पुलिस की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। ग्राम भगतपुरा निवासी शेर बहादुर 8 बजे (संभवतः शाम)बबुरी से जलखोर रोड होते हुए हटिया गांव के पास अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में अंधेरे के कारण उनका वाहन खेत के पास लगे खंभे से टकरा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना स्थल सुनसान था और आसपास कोई मदद के लिए मौजूद नहीं था।
घटना के कई घंटे बाद, रात लगभग 1 बजे घायल शेर बहादुर ने किसी तरह अपने पिता को फोन कर कहा, “पापा, मेरी जान बचा लीजिए।” बेटे की यह गुहार सुनते ही पिता ने तुरंत बबुरी थाने में सूचना दी। सूचना मिलते ही सब इंस्पेक्टर संजीत सिंह ने बिना देरी किए पुलिस टीम के साथ मौके की तलाश शुरू की। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने घायल युवक को ढूंढ निकाला और प्राथमिक देखभाल देते हुए सुरक्षित उनके घर पहुंचाया।
परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए शेर बहादुर को कमलापति हॉस्पिटल पहुंचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं।
सब इंस्पेक्टर संजीत सिंह की यह सतर्कता, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवता से भरी कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिलती, तो एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी। उनकी संवेदनशीलता ने न केवल एक युवक की जान बचाई बल्कि पुलिस की छवि को भी सशक्त किया है।
चंदौली से ~ शिवम् विश्वकर्मा की रिपोर्ट





