नोएडा ,कोरोना से माता-पिता को गंवाने वाले नोएडा के 50 फीसदी बच्चों को नहीं मिलेगा इस योजना का लाभ, जानें वजह
गौतमबुद्ध नगर के 50 बच्चों-बच्चियों को राज्य सरकार की योजना का लाभ नहीं मिलेगा
जनपद में कोविड संक्रमण की वजह से कुल 105 बच्चे प्रभावित हुए हैं
इनमें से 52 बच्चों को राज्य सरकार की महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया
योजना के लिए माता-पिता की सालाना आय 3 लाख से कम होनी चाहिए
नोएडा गौतम्बूदनगर, कोरोना वायरस महामारी की वजह से माता-पिता या इनमें से किसी एक को खो चुके गौतमबुद्ध नगर के 50 बच्चों को राज्य सरकार की तरफ से संचालित योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए अनेकानेक कारण बताए गए हैं। अफसरों की इस जानकारी से इन बच्चों के माता या पिता और अभिभावक परेशान हैं। वे प्रशासनिक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक जनपद में कोविड संक्रमण की वजह से कुल 105 बच्चे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अपने माता-पिता या इनमें से किसी एक को खो दिया है। इनमें से 52 बच्चों को राज्य सरकार की महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
अफसरों का कहना है कि इन बच्चों के अभिभावक यह साबित करने में असफल रहे हैं कि इनके पिता-माता या इनमें से किसी एक की मौत कोरोना वायरस महामारी की वजह से हुई है। कुछ अन्य मामलों में यह साबित नहीं हो पाया है कि इन बच्चों के माता-पिता उत्तर प्रदेश में पैदा हुए थे और यहीं के मूल निवासी थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित बच्चों को राहत देने के लिए इस महत्वपूर्ण योजना को लांच किया था। जिसके जरिए 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों को 4000 रुपये मासिक की मदद दी जाएगी। लेकिन इसके लिए बड़ी शर्त यह है कि वे उत्तर प्रदेश के नागरिक हों।
*ये थे नियम*
इस स्कीम के तहत राज्य सरकार अनाथ हुई बच्चियों को शादी के वक्त 1,01,000 का सहयोग राशि देगी। कई अभिभावकों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस योजना को लांच करने से पहले यह कहा था कि अगर कोई बच्चा उत्तर प्रदेश में पैदा हुआ है तो उसे इसका लाभ दिया जाएगा। भले ही उसके माता-पिता यहां के मूल निवासी ना हों। पांच साल की एक पीड़ित बच्ची के पिता की 27 अप्रैल को कोविड के इलाज के दौरान मौत हो गई। उसके पिता ओडिशा से थे। मां बंगाल से हैं। हालांकि दंपति पिछले सात साल से नोएडा में रह रहे थे।
*मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज-*
-डेथ सर्टिफिकेट, कोरोना से जान गंवाने वाले माता-पिता या दोनों के आधार कार्ड
-कोविड-19 आरटी-पीसीआर या एंटीजन रिपोर्ट या डॉक्टर-हॉस्पिटल की रिपोर्ट, जिसमें लिखा गया हो कि मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हुई है
-बच्चे का आधार कार्ड
-माता-पिता का निवास प्रमाण पत्र जिससे साबित हो कि वे उत्तर प्रदेश के निवासी हैं
-परिवार में जीवित माता या पिता की वार्षिक आय का प्रमाण पत्र
*नहीं मिला सहयोग*
बच्ची की मां ने बताया, “मेरी बेटी का जन्म इंदिरापुरम में हुआ था। हालांकि, जब हमने योजना के लिए आवेदन किया, तो हमसे गौतमबुद्ध नगर में किसी प्रॉपर्टी के कागजात मांगे गए। मैंने अधिकारियों को सूचित किया कि हम यूपी से नहीं हैं। उनसे यह जानने का प्रयास किया कि क्या मेरी बेटी को योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी और मुझे विधवा पेंशन योजना के लिए आवेदन करने के लिए कहा। सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद मुझे अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। साथ ही अब तक सक्षम अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को आय प्रमाण पत्र भी नहीं दिया है। जिससे साबित हो सके कि उनकी सालाना 3 लाख रुपये कम है। इस योजना के लिए यह एक और शर्त है।
*लक्षण होने के बावजूद नहीं करा पाए थे टेस्ट*
पीड़ित का एक सहयोगी परिवार के बचाव में आया है। उन्होंने बच्ची की पहली तिमाही की स्कूल फीस का भुगतान कर दिया है। दरअसल इस योजना का लाभ लेने वाले अभिभावकों के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी बाधा मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की है। कम आय के परिवारों के लिए यह बड़ा मसला है। कई ऐसे मृतक थे, जिनमें मौत के दौरान कोविड के लक्षण थे लेकिन वे अपना टेस्ट नहीं करा पाए। 11 और 15 साल के दो अन्य बच्चों के परिजन यह साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं कि उनके माता-पिता की मौत वायरस से हुई थी। उनके चाचा भूरा नाथ ने बताया, उन्होंने अधिकारियों के पास अपने पास मौजूद हर दस्तावेज जमा कर दिया था। लेकिन उन्हें समझाने में असफल रहे। एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में पढ़ने वाले दोनों बच्चों को अब एक सरकारी विद्यालय में आगे की पढ़ाई करनी होगी।
*मेडिकल रिकॉर्ड के अभाव में छूटे नाम*
जिला प्रोबेशन अधिकारी अतुल सोनी ने इस पर कहा, दस्तावेजों की कमी के कारण कई बच्चों को लाभार्थियों की सूची में शामिल नहीं किया जा सका। यह एक सरकारी नियम है। मेडिकल रिकॉर्ड से जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि बच्चों के माता-पिता की मौत कोविड से हुई है, उन्हें पात्र नहीं माना जा सकता है। योजना का लाभ पाने में एक बड़ी अड़चन आय प्रमाण पत्र की है। दरअसल मुख्यमंत्री बाल विकास योजना के लिए माता-पिता की सालाना आय 3 लाख से कम होनी चाहिए। वायरस की दूसरी लहर में तमाम बच्चों के सर से पिता का साया छिन गया। मां गृहिणी हैं। उनके लिए आय प्रमाण पत्र बनवाना मुश्किल है।
*नई योजना शुरू करेगी सरकार*
हालांकि इन मुश्किलों का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार एक नई योजना पर विचार कर रही है। राज्य महिला और बाल विभाग के निदेशक मनोज राय ने कहा, सरकार अब उन बच्चों को शामिल करने की योजना बना रही है, जो दस्तावेजों की कमी के कारण छूट गए हैं। इनके लिए एक नई योजना ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समानता’ शुरू की जाएगी। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में तमाम पीड़ित परिवारों को परेशानी हुई है। इसलिए हमने एक और योजना शुरू की है। इसके तहत उन बच्चों को 2,500 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जिन्होंने 1 मार्च, 2020 के बाद किसी एक या माता-पिता दोनों को खो दिया है।
UP 18 NEWS से आशीष मोदनवाल की रिपोर्ट




